(hindi) Bassi Bhaat Me Khuda Ka Sajha

(hindi) Bassi Bhaat Me Khuda Ka Sajha

“शाम को जब दीनानाथ ने घर आकर गौरी से कहा, कि “मुझे एक ऑफिस में पचास रुपये की नौकरी मिल गई है”, तो गौरी खिल उठी। देवताओं में उसका विश्वास  और भी गहरा हो गया । इधर एक साल से बुरा हाल था। न कोई रोजी थी न रोजगार। घर में जो थोड़े-बहुत गहने थे, वह बिक चुके थे। मकान का किराया सिर पर चढ़ा हुआ था। जिन दोस्तों से कर्ज मिल सकता था, सबसे ले चुके थे। साल-भर का बच्चा दूध के लिए तड़प रहा था। एक वक्त का खाना  मिलता, तो दूसरे वक़्त की चिन्ता होती।

तकाजों के मारे बेचारे दीनानाथ का घर से निकलना मुश्किल था। घर से निकला नहीं कि चारों ओर से शोर मच जाता  “वाह बाबूजी, वाह ! दो दिन का वादा करके ले गये और आज दो महीने से सूरत नहीं दिखायी ! भाई साहब, यह तो अच्छी बात नहीं, आपको अपनी जरूरत का खयाल है, मगर दूसरों की जरूरत का जरा भी खयाल नहीं ? इसी से कहा है- दुश्मन को चाहे कर्ज दे दो, दोस्त को कभी न दो”। दीनानाथ को ये बातें तीर सी लगती थी और उसका जी चाहता था कि जीवन का अन्त कर डाले, मगर पत्नी और छोटे मासूम बच्चे का मुँह देखकर कलेजा थाम के रह जाता। आज भगवान् ने उस पर दया की और बुरे  दिन कट गये।

गौरी ने ख़ुश होकर कहा, 'मैं कहती थी कि नहीं, भगवान् सबकी सुध लेते हैं और कभी-न-कभी हमारी भी सुध लेंगे, मगर तुम्हें विश्वास ही न होता था, बोली  “अब तो भगवान् की दया के कायल हुए ?'

दीनानाथ ने ज़ोर देकर कहा- “यह मेरी दौड़-धूप का नतीजा है, इसमें भगवान् की क्या दया? भगवान् को तो तब जानता, जब कहीं से छप्पर फाड़कर पैसे भेज देते”।
लेकिन मुँह से चाहे कुछ कहे, भगवान् के प्रति उसके मन में श्रद्धा जाग गयी थी।

दीनानाथ का मालिक बड़ा ही रूखा आदमी था और काम में बड़ा चुस्त। उसकी उम्र पचास के लगभग थी और सेहत भी अच्छी न था, फिर भी वह ऑफिस में सबसे ज्यादा काम करता। मजाल न थी कि कोई आदमी एक मिनट की भी देर करे, या एक मिनट भी समय के पहले चला जाय। बीच में 15 मिनट की छुट्टी मिलती थी, उसमें जिसका जी चाहे पान खा ले, या सिगरेट पी ले या खान पान कर ले।

इसके अलावा एक मिनट की छुट्टी न मिलती थी। वेतन पहली तारीख को मिल जाता था। त्योहारों में भी दफ्तर बंद रहता था और तय समय के बाद कभी काम न कराया जाता था। सभी काम करने वालों को बोनस मिलता था और प्रॉविडेन्ट फंड की भी सुविधा थी। फिर भी कोई आदमी खुश न था। काम या समय की पाबन्दी की किसी को शिकायत न थी। शिकायत थी सिर्फ़ मालिक के रूखे व्यवहार की। कितना ही जी लगाकर काम करो, कितना ही जान दे दो, पर उसके बदले धन्यवाद का एक शब्द भी न मिलता था।

काम करने वालों में और कोई सन्तुष्ट हो या न हो, दीनानाथ को मालिक से कोई शिकायत न थी। वह डांट और फटकार सुनकर भी शायद उतनी ही मेहनत से काम करता। साल-भर में उसने कर्ज चुका दिये और कुछ पैसे जमा भी कर लिया। वह उन लोगों में था, जो थोड़े में भी संतुष्ट रह सकते हैं – अगर नियमित रूप से मिलता जाय। एक रुपया भी किसी खास काम में खर्च करना पड़ता, तो पति पत्नी में घंटों सलाह होती और बड़े झाँव-झाँव के बाद कहीं मंजूरी मिलती थी। बिल गौरी की तरफ से पेश होता, तो दीनानाथ विरोध में खड़ा होता। दीनानाथ की तरफ से पेश होता, तो गौरी उसकी कड़ी निंदा करती। बिल को पास करा लेना पेश करने वाले की जोरदार वकालत पर निर्भर करता था । सर्टिफाई करने वाली कोई तीसरी शक्ति वहाँ न थी।

और दीनानाथ अब पक्का आस्तिक हो गया। भगवान्  की दया या न्याय में अब उसे कोई शक न था । रोज़ पूजा और गीता का पाठ करने लगा । एक दिन उसके एक नास्तिक दोस्त ने जब भगवान् की बुराई की, तो उसने कहा- “भाई, इसका तो आज तक फ़ैसला नहीं हो सका कि भगवान् हैं या नहीं”। दोनों पक्षों के पास मज़बूत दलीलें मौजूद थीं ; लेकिन मेरे विचार में नास्तिक रहने से आस्तिक रहना कहीं अच्छा है। अगर भगवान् की सत्ता है, तब तो नास्तिकों को नरक के सिवा कहीं ठिकाना नहीं मिलेगा। आस्तिक के दोनों हाथों में लड्डू है। भगवान्  है तो पूछना ही क्या, नहीं है, तब भी क्या बिगड़ता है। दो-चार मिनट का समय ही तो जाता है ?

नास्तिक दोस्त इस दोरुखी बात पर मुँह बिचकाकर चल दिये।

Puri Khaani Sune…

(hindi) अनमोल भेंट/मुन्ने की वापसी

(hindi) अनमोल भेंट/मुन्ने की वापसी

“रायचरण जब बारह साल का था तब से बच्चे की देखभाल करने का काम करने लगा था । उसके बाद काफी समय बीत गया। नन्हा बच्‍चा रायचरण की गोद से निकलकर स्कूल जाने लगा , स्कूल से कॉलेज में पहुँचा, फिर एक सरकारी जगह पर काम में लग गया। लेकिन  रायचरण अब भी बच्‍चा खिलाता था, यह बच्‍चा उसकी गोद के पाले हुए बच्चे अनुकूल बाबू का बेटा  था।

बच्‍चा घुटनों के बल चलकर बाहर निकल जाता। जब रायचरण दौड़कर उसे पकड़ता तो वह रोता और अपने नन्हे-नन्हे हाथों से रायचरण को मारता।

रायचरण हंसकर कहता- “हमारा भैया भी बड़ा होकर जज साहब बनेगा”- जब वह रायचरण को चन्ना कहकर पुकारता तो उसका दिल ख़ुशी से भर जाता । वह दोनों हाथ ज़मीन पर टेककर घोड़ा बनता और बच्‍चा उसकी पीठ पर सवार हो जाता।

इन्हीं दिनों अनुकूल बाबू का ट्रांसफर परयां नदी के किनारे एक जिले में हो गया । नए जगह की ओर जाते हुए कलकत्ते से उन्होंने अपने बच्चे के लिए कीमती गहने और कपड़ों के अलावा एक छोटी-सी सुन्दर गाड़ी भी खरीदी।

बारिश का मौसम था । कई दिनों से मूसलाधर बारिश हो रही थी।भगवान् –भगवान्  करते हुए बादल फटे। शाम का समय था। बच्चे ने बाहर जाने के लिए ज़िद की । रायचरण उसे गाड़ी में बिठाकर बाहर ले गया। खेतों में पानी खूब भरा हुआ था। बच्चे ने फूलों का गुच्छा देखकर जिद की, रायचरण ने उसे बहलाना चाहा लेकिन वह न माना। मजबूर  रायचरण बच्चे का मन रखने के लिए घुटनों-घुटनों पानी में फूल तोड़ने लगा।

कई जगहों पर उसके पांव कीचड़ में बुरी तरह धंस गये। बच्‍चा थोड़ी देर चुपचाप  गाड़ी में बैठा रहा, फिर उसका ध्यान लहराती हुई नदी की ओर गया। वह चुपके से गाड़ी से उतरा। पास ही एक लकड़ी पड़ी थी, उसे उठाई  और भयानक नदी के किनारे पर पहुंचकर उसकी लहरों से खेलने लगा। नदी के शोर में ऐसा लग रहा था कि नदी की चंचल और बातूनी जल-परियां सुन्दर बच्चे को अपने साथ खेलने के लिए बुला रही हैं।

रायचरण फूल लेकर वापस आया तो देखा गाड़ी खाली है। उसने इधर-उधर देखा, उसके पैरों के नीचे से ज़मीन निकल गई। वो पागलों की तरह चारों ओर देखने लगा। वह बार-बार बच्चे का नाम लेकर पुकारता लेकिन जवाब  में 'चन्ना' की मधुर आवाज़ न आती।

चारों ओर अंधेरा छा गया। बच्चे की माँ को चिन्ता होने लगी। उसने चारों ओर आदमी दौड़ाये। कुछ लोग लालटेन लिये हुए नदी के किनारे खोज करने पहुँचे। रायचरण उन्हें देखकर उनके पैरों में गिर पड़ा। उन्होंने उससे सवाल करन शुरू किया लेकिन वह हर सवाल के जवाब में यही कहता-“मुझे कुछ नहीं मालूम”।

शायद हर आदमी का यही मानना था कि छोटे बच्चे को परयां नदी ने अपने आंचल में छिपा लिया है लेकिन फिर भी दिल में तरह-तरह की शंकायें पैदा हो रही थीं। एक यह कि उसी शाम को नगर से निकाले गए लोगों का एक समूह नगर से गया था और मां को शक था कि रायचरण ने कहीं बच्चे को उनके हाथों न बेच दिया हो। वह रायचरण को अलग ले गई और उससे विनती करते हुए कहने लगी-“रायचरण, तुम मुझसे जितना रुपया चाहो ले लो, लेकिन भगवान् के लिए मेरी दशा पर तरस खाकर मेरा बच्‍चा मुझे वापस कर दो”।

लेकिन रायचरण कुछ जवाब न दे सका, सिर्फ़ माथे पर हाथ मारकर चुप  हो गया।

मालकिन ने गुस्से की दशा में उसे घर-से बाहर निकाल दिया। अनुकूल बाबू ने पत्नी को बहुत समझाया लेकिन माँ के दिल से शक दूर न हुआ । वह बराबर यही कहती रही कि- “मेरा बच्‍चा सोने के गहने पहने हुए था, ज़रूर इसने…”

रायचरण अपने गांव वापस चला आया। उसके कोई औलाद न थी और न ही बच्चा होने की कोई सम्भावना थी। लेकिन साल ख़त्म होने पर उसके घर बेटे ने जन्म लिया; लेकिन पत्नी बच्चे को जन्म देने के बाद मर गई। घर में एक विधवा बहन थी। उसने बच्चे की परवरिश का भार अपने ऊपर लिया।

जब बच्‍चा घुटनों के बल चलने लगा, वह घर वालों की नजर बचा कर बाहर निकल जाता। रायचरण जब उसे दौड़कर पकड़ता तो वह चंचलता से उसे मारता। उस समय रायचरण की आँखों के सामने अपने उस नन्हें मालिक की सूरत फिर जाती जो परयां नदी की लहरों में गायब हो गया था।..

Puri Kahaani Sune….

(hindi) Ichha Purti

(hindi) Ichha Purti

“सुबलचंद्र के लड़के का नाम सुशीलचंद्र था। लेकिन अब ऐसा तो होता नहीं है कि जैसा नाम हो, आदमी भी वैसा ही हो। ‘सुबल’ का मतलब है ‘ताक़तवर’, लेकिन वह तो कुछ दुबला-पतला ही था, और ‘सुशील’ का मतलब है ‘अच्छे स्वभाव वाला’, पर, वह तो ऐसा नहीं था, बहुत ही चंचल था ।

सुशील अपनी करतूतों से पूरे मोहल्ले को परेशान कर के रखता था। पर, उसके पिता भी उसे कुछ नहीं कह पाते थे क्योंकि वह उनकी पकड़ में नहीं आता था। वे ठहरे गठिया के रोगी भागना-दौड़ना उनके लिए आसान न था, और सुशील था फुर्तीला, हिरण जितना तेज़ भागता था, जब देखो तब चंपत हो जाता।

शनिवार का दिन था, स्कूल दिन में दो बजे बंद हो जाता था। पर, सुशील स्कूल नहीं जाना चाहता था. उसके कई कारण थे पहला उस दिन उसका क्लास टेस्ट था। इसके अलावा, वह सारा दिन शाम को होने वाली पटाखेबाज़ी की तैयारी में बिताना चाहता था। सुबह से ही इसकी धूमधाम से तैयारी चल रही थी और वो सारा दिन वहीँ बिताना चाहता था. 

जब स्कूल जाने का समय हुआ तो उसने अपने पिता से कहा कि वह स्कूल नहीं जायेगा क्योंकि उसके पेट में दर्द हो रहा है। सुबह को पता था कि उसका पेट-दर्द कैसे भगाया जा सकता है, इसलिए उसने कहा, ”फिर तुम घर पर ही रह सकते हो। हरि पटाखेबाज़ी देख आयेगा। मैं तुम्हारे लिए कुछ टॉफियाँ भी लाया था पर, अब तो तुम उन्हें नहीं खा सकोगे। हाँ, मैं तुम्हारे लिए कड़वी दवा ले आता हूँ!” यह कहकर उसने दरवाज़े पर ताला लगाया और बाहर चला गया।

अब सुशील अजीब उलझन में था। वह टॉफियों से जितना प्यार करता था, दवा से उसे उतनी ही नफ़रत थी और अब तो वह पटाखेबाज़ी देखने भी नहीं जा सकेगा।

जब सुशील के पिता कप में दवाई लेकर लौटे तो वह झट से उठ खड़ा हुआ, और बोला, ”मैं अब ठीक हूँ। मैं सोच रहा हूँ स्कूल चला जाऊँ।” उसके पिता ने उसे ज़बरदस्ती दवा पिला दी, आराम करने के लिए कहा, और फिर दरवाज़े पर ताला लगाकर चले गए।

सुशील दिन भर रोता रहा और यही सोचता रहा कि अगर मैं अपने पिता जितना बड़ा होता, तो मैं भी जो चाहे कर सकता था, और मुझे कोई कमरे में बंद नहीं कर सकता था। सुशील के पिता भी बाहर बैठा हुआ सोच रहा था, मेरे माता-पिता के लाड-प्यार ने मुझे बिगाड़ दिया था। मैंने ठीक से पढ़ाई नहीं की। अगर मुझे मेरा बचपन वापस मिल जाए तो मैं समय बिल्कुल बर्बाद नहीं करूंगा और ठीक से पढाई करूंगा।

संयोग से, इच्छा पूरी करने वाली देवी उस समय उधर से गुज़र रही थी उसने उन लोगों की इच्छाएँ सुन लीं और मन ही मन कहा, “चलो थोड़ी देर के लिए इनकी इच्छाएँ पूरी कर देती हूँ, फिर देखती हूँ कि क्या होता है”।

वह पिता के पास पहुँची और बोली “अब से वह अपने बेटे जैसा हो जाएगा, उसी की उम्र का और बेटे से उसने कहा कि वह पिता जितनी उम्र का हो जाएगा”।

सुबह-सुबह बूढ़ा सुबलचंद्र बिस्तर से उछल कर खड़ा हुआ। उसने पाया कि उसका शरीर छोटा-सा हो गया है, मुँह में सारे दाँत आ गए हैं। रात को उसने जो कपड़े पहने थे, वे उसके लिए बहुत ढीले और बड़े हो गए हैं। नतीज़ा यह था कि उसकी धोती नीचे खिसक रही थी और उसका चलना-फिरना मुश्क़िल हो रहा था।

उधर सुशीलचंद्र जो सुबह उठते ही शरारतें शुरू कर देता था, इस सुबह बिस्तर से उठ भी नहीं सका। अंत में उसके पिता की चीख-चिल्लाहट ने उसे उठने पर मजबूर कर दिया। उसके कपड़े इतने छोटे और टाइट  हो गए थे कि पहने नहीं जा रहे थे। उसके सफेद दाढ़ी-मूछ उग आई थीं, और उसने उसके चेहरे को आधा ढँक लिया था, उसके घने बालों की जगह, उसका सिर एक चमकता हुआ-सा सफाचट मैदान हो गया था।

Puri Kahani Sune…

(hindi) Phool Ka Mulya

(hindi) Phool Ka Mulya

“सर्दियों के दिन थे। ठिठुराने वाली ठंड के कारण पौधों पर से फूल झड गए थे। बगीचे-जंगलों  में उदासी छाई हुई थी। फूलों की कमी में पौधे  मुरझाए और कुम्ल्हाए हुए दिखाई दे रहे थे।

ऐसे उदास वातावरण में एक झील के बीच में कमल का फूल खिला हुआ देखकर उसका माली  ख़ुश हो उठा। उस माली का नाम सुदास था। ऐसा सुंदर फूल तो कभी उसके झील  में खिला ही नहीं था। सुदास उस फूल की सुंदरता पर मुग्ध हो उठा। उसने सोचा कि मैं अगर  यह फूल राजा साहब के पास लेकर जाऊँगा, तो वह ख़ुश हो जाएँगे। राजा साहब फूलों की सुंदरता के दीवाने थे। इस सर्दी में जब फूलों की कमी है, तब इतना सुंदर फूल देखकर उसे इसका मनचाहा इनाम मिलने की उम्मीद थी।

उसी समय एक ठंडी लहर आई। सुदास को लगा कि यह पवन भी कमल के खिलने पर अपनी ख़ुशी ज़ाहिर कर रही है। माली को यह सब शुभ लक्षण लगे।

वह हज़ारों पंखुड़ियों वाले कमल के फूल को देखकर मन-ही-मन फूला नहीं समा रहा था। वह उस फूल को लेकर राजमहल की ओर चल पड़ा। वह मनचाहे इनाम की कामना में डूबा हुआ था। राजमहल पहुँचकर उसने राजा को समाचार भिजवाया। वह इस विचार में मग्न था कि अभी उसे राजा बुलाएँगे। राजा इस सुंदर फूल को देखकर बेहद ख़ुश होंगे। अच्छे कीमत की कामना में वह बड़े ध्यान से उस फूल को पकड़े हुए उसे प्रेम से निहार रहा था।

राजमहल के बाहर खड़ा वह राजा द्वारा बुलाए जाने का इंतज़ार कर ही रहा था कि तभी राजपथ पर जाता हुआ एक भला आदमी कमल के फूल की सुंदरता पर मोहित होकर सुदास के पास आकर पूछने लगा-“फूल बेचोगे?””

“मैं तो यह फूल राजा जी के चरणों में अर्पित करना चाहता हूँ।” -सुदास यह जवाब देकर चुप हो गया।

“तुम यह फूल राजा जी को देना चाहते हो, लेकिन मैं तो यह फूल राजाओं के भी राजा जी के चरणों में अर्पित करना चाहता हूँ। भगवान बुद्ध यहाँ पधारे हैं। बोलो, तुम इसका क्या दाम लेना चाहते हो?”

“मैं चाहता हूँ कि मुझे इसके बदले एक माशा (आठ रत्ती मान की एक तरह की तौल जिसका इस्तेमाल सोने, चाँदी, रत्नों और औषधियों के तौलने में होता है।) सोना मिल जाए।”
उस आदमी ने तुरंत ही दाम स्वीकार कर लिया।

तभी शहनाइयाँ बज उठीं। मंगल बाजे बज उठे। सुंदर थाल सजाए हुए सुंदर औरतों का झुंड उधर ही चला आ रहा था। राजा प्रसेनजीत पैदल ही भगवान बुद्ध के दर्शन के लिए जा रहे थे। नगर के बाहरी भाग में वे विराजमान थे। सुदास के पास कमल का फूल देखकर वे ख़ुश  हो उठे। इस कपकपाती ठंड में फूल कहीं ढूँढने से भी नहीं मिल रहे थे। ऐसे में इतने सुंदर फूल को देखकर उनका मोहित होना स्वाभाविक ही था। उनकी पूजा की थाली में फूल की ही कमी थी।
राजा जी ने सुदास से पूछा-“इस फूल का क्या दाम लोगे?”
सुदास बोला-“ महाराज, फूल तो यह सज्जन ले चुके हैं।”
“कितने में?””
“एक माशा स्वर्ण में।””
“मैं तुम्हें इस फूल के बदले दस माशा स्वर्ण दूँगा।””
राजा जी की वंदना करके उन सज्जन ने कहा-“ सुदास, मेरी तरफ़ से बीस माशे स्वर्ण ले लो।””

राजा जी से विनती करते हुए वह सज्जन बोला-“महाराज, आप और मैं दोनों ही बुद्ध के चरणों में यह फूल अर्पित करना चाहते हैं। इसलिए आप और मैं इस समय राजा या प्रजा न होकर दो भक्तों की तरह ही व्यवहार करें तो ज़्यादा अच्छा रहेगा। भगवान की नज़र में सभी भक्त एक समान होते हैं।””

बड़े मिठास के साथ राजा प्रसेनजीत ने कहा-“ भक्तजन, मैं आपकी बात सुनकर ख़ुश हुआ। आप इस फूल के लिए बीस माशा दे रहे हैं, तो मैं इसका दाम चालीस माशा स्वर्ण देने के लिए तैयार हूँ।””
“”तो मेरे…।””

भक्त के बात पूरा करने से पहले ही सुदास बोल पड़ा-“ हे राजन्‌ और भक्तजन, आप दोनों ही मुझे माफ़ करें। मुझे यह फूल नहीं बेचना है।” इतना कह कर वह वहाँ से चल पड़ा। वे दोनों उसे आश्चर्यचकित होकर देखते रह गए।

सुदास फूल लेकर गौतम बुद्ध के स्थान की ओर चल पड़ा। वह सोच रहा था कि जिस बुद्ध देव को देने के लिए यह दोनों इस फूल की इतनी कीमत देने को तैयार हैं, अगर मैं ख़ुद ही उन्हें यह फूल अर्पित करूँ, तो मुझे इससे कहीं ज़्यादा दौलत मिलेगी।

वह महात्मा बुद्ध के स्थान की ओर चल पड़ा। उसने देखा कि एक वट के पेड़ के नीचे महात्मा बुद्ध ध्यान में लीन होकर पद्मासन की मुद्रा में बैठे थे। उनके माथे पर एक अद्भुत चमक थी, चेहरे पर सूर्य का सा तेज, होठों पर आनंद और आँखों से जैसे अमृत छलक रहा था। उनका व्यक्तित्व इतना मनमोहक और दिव्य था कि कोई भी उससे मोहित हो सकता था।

सुदास उन्हें देखकर अपने होशो-हवास भूलकर आदर के साथ बिना पलक झपकाए उन्हें निहारने लगा। आगे बढ़कर उसने आदर के साथ उनके चरणों में वह फूल अर्पित कर दिया। उसका तन-मन एक अलौकिक और दिव्य सुख का अनुभव कर रहा था।

महात्मा बुद्ध ने उससे पूछा-“”हे वत्स! क्‍या चाहिए? आपकी क्‍या इच्छा है?””

सुदास मधुरता से बोला-“”कुछ नहीं, बस आपका आशीर्वाद चाहिए।””

Puri Kanai Sune…..

(hindi) Tota

(hindi) Tota

“एक तोता था । वह बड़ा मूर्ख था। वो गाता तो था, पर शास्त्र नही पढ़ता था । वो उछलता था, फुदकता था, उड़ता था, पर यह नहीं जानता था कि क़ायदा-क़ानून किसे कहते हैं ।
राजा बोले, ''ऐसा तोता किस काम का? इससे फ़ायदा तो कुछ हैं नहीं, नुक्सान  ज़रूर है । ये जंगल के फल खा जाता है, जिससे राजा-मण्डी के फल-ब़ाजार में फलों की कमी हो जाती है ।''
उन्होंने मंत्री को बुलाकर कहा, ''इस तोते को पढ़ाओ!''

तोते को पढ़ाने का काम राजा के भानजे को मिला ।
पण्डितों की बैठक हुई । विषय था, ''इस जीव की अज्ञानता का कारण क्या है?'' बड़ा गहरा विचार हुआ ।
नतीजा निकला : तोता अपना घोंसला मामूली घास फूस से बनाता है । ऐसे घर में विद्या नहीं आती । इसलिए सबसे पहले तो यह ज़रूरी है कि इसके लिए कोई बढ़िया-सा पिंजरा बना दिया जाय ।
राज-पण्डितों को दक्षिणा मिली और वे ख़ुश होकर अपने-अपने घर गये ।

सुनार बुलाया गया । वह सोने का पिंजरा तैयार करने में जुट गया । पिंजरा ऐसा अनोखा बना कि उसे देखने के लिए देश-विदेश के लोग टूट पडे । कोई कहता, ''लो हो गई पढ़ाई ।'' कोई कहता, ''ज्ञान ना भी मिले तो क्या, पिंजरा तो बना । इस तोते का भी क्या नसीब है!''

सुनार को थैलियाँ भर-भरकर इनाम मिला । वह उसी घड़ी अपने घर की ओर रवाना हो गया ।
पण्डितजी तोते को पढ़ाने बैठे । वो परेशान लेकर बोले, ''यह काम थोड़ी सी पोथियों का नहीं है ।''

राजा के भानजे ने सुना । उन्होंने उसी समय पोथी लिखने वालों को बुलवाया । पोथियों की नकल होने लगी । नक़ल हुई और नक़ल की भी नक़ल के पहाड़ लग गये । जिसने, भी देखा, उसने यही कहा कि, ''शाबाश! इतनी विद्या है की रखने को जगह भी नहीं रहेगी!''

नक़ल करने वालों को लद्दू बैलों पर लाद-लादकर इनाम दिये गए । वे अपने-अपने घर की ओर दौड़ पड़े । उनकी दुनिया में तंगी का नामो -निशान भी बाकी न रहा ।
कीमती पिंजरे की देख-रेख में राजा के भानजे बहुत व्यस्त रहने लगे । इतने व्यस्त कि व्यस्तता की कोई सीमा न रही । मरम्मत के काम में भी लगे ही रहते । फिर झाडू-पोंछा और पालिश की धूम भी मची रहती थी । जो ही देखता, यही कहता कि ''उन्नति हो रही है।''

इन कामों पर कई लोग लगाये गये और उनके काम की देख-रेख करने पर और भी कई लोग लगे । सब हर महीने मोटे-मोटे वेतन लेकर बड़े-बड़े बक्से भरने लगे ।

वे और उनके चचेरे-ममेरे-मौसेरे भाई-बंद बड़े ख़ुश हुए और बड़े-बड़े घरों और छतों पर मोटे-मोटे गद्दे बिछाकर बैठ गये ।

दुनिया में यूं तो और भी कई चीज़ों की कमी है, पर बुराई करने और मज़ाक उड़ाने वालों की कोई कमी नहीं है। एक ढूँढो तो हज़ार मिलते हैं । वे बोले, ''पिंजरे की तो उन्नति हो रही है, पर तोते की खोज-खबर लेने वाला कोई नहीं है!”

बात राजा के कानों में पड़ी । उन्होंने भानजे को बुलाया और कहा, ''क्यों भानजे साहब, यह कैसी बात सुनाई पड़ रही है? ''

भानजे ने कहा, ''महाराज, अगर सच-सच बात सुनना चाहते हों तो सुनारों को बुलाइये, पण्डितों को बुलाइये, नक़ल करने वालों को बुलाइये, मरम्मत करने वालों को और मरम्मत की देखभाल करने वालों को बुलाइये । बुराई करने वालों को हलवे-मॉड़े मे हिस्सा नहीं मिलता, इसीलिए वे ऐसी शर्मनाक और बुरी बातें करते हैं ।''

जवाब सुनकर राजा ने पूरे मामले को अच्छी तरह और साफ-साफ समझ लिया । भानजे के गले में तुरंत सोने के हार पहनाये गये ।

राजा का मन हुआ कि एक बार चलकर अपनी आँखों से यह देखें कि शिक्षा कैसे धूमधड़ाके और कैसे दिखावे से तेज़ी के साथ चल रही है । इसलिए , एक दिन वह अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और मन्त्रियों के साथ ख़ुद  स्कूल में आ धमके ।

उनके पहुँचते ही देहलीज़ के पास शंख, घड़ियाल, ढोल, तासे, खुरदक, नगाड़े,  काँसे, बांसुरी, झाल, करताल, मृदंग वगैरह-वगैरह अपने आप ही बज उठे ।

पण्डित गला फाड़-फाड़कर और बूटियां फड़का-फड़काकर मन्त्र-पाठ करने लगे । मिस्त्री, मजदूर, सुनार, नक़ल करने वाले, देख-भाल करने वाले और उन सभी के ममेरे, फुफेरे, चचेरे, मौसेरे भाई जय-जयकार करने लगे ।

भानजा बोला, ''महाराज, देख रहे हैं न?''
महाराज ने कहा, ''आश्चर्य! शब्द तो कोई कम नहीं हो रहा!
भानजा बोला, ''शब्द ही क्यों, इसके पीछे का मतलब भी कोई कम नहीं है !''

राजा ख़ुश होकर लौट पड़े । देहलीज़ को पार करके हाथी पर सवार होने ही वाले थे कि पास के झाड़ियों में छिपा बैठा एक बुराई करने वाला बोल उठा, ''महाराज आपने तोते को देखा भी है?''
राजा चौंके। बोले, ''अरे हाँ! यह तो मैं बिलकुल भूल ही गया था! तोते को तो देखा ही नहीं! ''
वो लौटकर पण्डित से बोले, ''मुझे यह देखना है कि तोते को तुम पढ़ाते किस ढंग से हो ।''

पढ़ाने का ढंग उन्हें दिखाया गया । देखकर उनकी खुशी का ठिकाना न रहा । पढ़ाने का ढंग तोते की तुलना में इतना बड़ा था कि तोता दिखाई ही नहीं पड़ता था । राजा ने सोचा : अब तोते को देखने की जरूरत ही क्या है? उसे देखे बिना भी काम चल सकता है! राजा ने इतना तो अच्छी तरह समझ लिया कि बंदोबस्त में कहीं कोई भूल-चूक नहीं है । पिंजरे में दाना-पानी तो नही था, थी तो सिर्फ पढ़ाई ।

यानी ढ़ेरों किताबों के ढेर सारे  पन्ने फाड़-फाड़कर कलम की नोंक से तोते के मुँह में घुसेड़े जा रहे थे । तोते का गाना तो बन्द हो ही गया था बल्कि चीखने -चिल्लाने के लिए भी कोई गुंजायश नही छोड़ी गयी थी । तोते का मुँह ठसाठस भरकर बिलकुल बन्द हो गया था । उसे देखने वाले के रोंगटे खड़े हो जाते ।

अब दोबारा जब राजा हाथी पर चढ़ने लगे तो उन्होंने कान-खींचने वाले  सरदार को हिदायत दे दी कि ''बुराई करने वाले के कान अच्छी तरह मरोड़ देना!''

Puro Kahani Sune….

(hindi) Shanti

(hindi) Shanti

“स्वर्गीय देवनाथ मेरे बहुत अच्छे दोस्तों में से एक थे। आज भी जब उनकी याद आती है, तो उनके साथ बिताए हुए अच्छे समय भी याद आते हैं, और मैं कहीं अकेले में जाकर रो लेता हूँ। मैं लखनऊ में रहता था और वह दिल्ली में, जोकि 200-250 मील की दूरी पर है। लेकिन शायद ही ऐसा कोई महीना हो जब हम मिलें न हों। वह आज़ाद स्वभाव के, हँसी मजाक करनेवाले, अच्छे दिल के, दोस्तों पर जान लुटाने वाले आदमी थे, जिन्होंने अपने और दूसरों में कभी अंतर नहीं किया। उन्होंने दुनिया या दुनियादारी को समझने की कभी कोशिश नहीं की। उनकी जिंदगी में ऐसे बहुत से समय आए, जब उन्हें होशियार हो जाना चाहिए था।

दोस्तों ने उनकी सरलता का गलत फायदा उठाया, कई बार उन्हें बेइज्जत होना पड़ा, लेकिन उन्होंने जैसे जिंदगी से कुछ न सीखने की कसम खा रखी हो। लेकिन वह कभी नहीं बदले, उनकी दुनिया में शक, चालाकी और धोखे की कोई जगह नहीं थी, उनके लिए सब अपने थे। मैंने उन्हें कई बार समझाना चाहा लेकिन उन पर कोई असर नहीं हुआ। मुझे कभी-कभी यह चिंता होती थी कि अगर वह नहीं बदले तो उनके साथ क्या होगा? लेकिन परेशानी यह थी कि उनकी बेबी गोपा भी उन्हीं की तरह थी। हमारी बीवियों में जो समझ होती है जिससे वह हमेशा अपने पतियों की लापरवाही पर रोक लगाती हैं  वह उन में नहीं थी। यहाँ तक उनमें सजने सवरने की भी कोई इच्छा नहीं थी। इसलिए जब देवनाथ के गुजरने की खबर पा कर मैं दिल्ली पहुंचा, तो घर में बरतन और मकान को छोड़कर कोई संपत्ति नहीं थी।

और अभी उनकी इतनी उम्र ही नहीं थी, कि वह पैसा बचाने के बारे में सोचते। वह तो अभी 40 के भी नहीं हुए थे। हालांकि बचपना उनके स्वभाव में था, लेकिन इस उम्र में तो सभी बेफिक्र होते हैं। उनकी एक लड़की के बाद दो लड़के थे, जो कि कम उम्र में ही धोखा दे गए। और अब बस लड़की का बचा होना ही, इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा दुखी करने वाला भाग था। उनकी हालत को देखते हुए, उनके परिवार को चलाने के लिए महीने में 200 रूपये की जरूरत थी। लड़की की भी शादी दो-तीन साल में करनी पड़ेगी। यह सब कैसे होगा, यह सोच कर मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया।

इस मौके पर मुझे पता चला कि जो लोग मतलबी नहीं होते और दूसरों की मदद करते हैं, उनके परिवार की मदद करने वालों की कमी नहीं होती। यह जरूरी भी नहीं, क्योंकि मैंने ऐसे भी लोगों को देखा है, जिन्होंने जिंदगी भर बहुत से लोगों की मदद की, लेकिन उनके बाद उनके परिवार के बारे में किसी ने पूछा तक नहीं। लेकिन जो भी हो, देवनाथ के दोस्तों ने यह अच्छा काम किया कि गोपा का खर्च चलाने के लिए पैसे फिक्स डिपॉजिट करने की बात रखी। एक दो लोग जिनकी बीवियां अब नहीं थीं, उन्होंने शादी करने की भी बात रखी, लेकिन किसी भी साधारण बीवी की तरह गोपा ने भी स्वाभिमान से मना कर दिया। उसका घर बड़ा था तो उसने घर के आधे भाग को किराए पर चढ़ा दिया। और इससे उन्हें महीने के 50 रूपये मिलने लगे। वह उसी से अपना खर्च चलाने लगी। जो कुछ खर्च था, वह सुन्नी की जात से था। गोपा के अब कोई शौक नहीं थे।

एक महीने बाद, मुझे बिजनेस के सिलसिले में विदेश जाना पड़ा। वहाँ, मेरी सोच के विपरीत, मुझे 2 साल लग गए। गोपा से चिट्ठी के जरिए बात होती रहती थी, जिससे मुझे पता चला कि चिंता की कोई बात नहीं, वह आराम से रह रहे हैं। लेकिन मुझे यह बाद में पता चला कि गोपा ने मुझे भी बाहर वाला समझ कर मुझसे सच्चाई छुपाई।

विदेश  से लौटकर मैं सीधा दिल्ली गया। दरवाजे पर पहुंचते ही मुझे रोना आ गया। वहाँ मातम सा माहौल था। जिस कमरे में दोस्तों का भीड़ रहती थी, उसके दरवाजे बंद थे और वहाँ मकड़ी के जाले लग चुके थे। पहली बार देखने पर मुझे ऐसा लगा कि दरवाजे पर देवनाथ खड़े होकर मुस्कुराते हुए मुझे देख रहे हैं। मैं झूठ नहीं बोलता और मुझे भूतों पर विश्वास भी नहीं, लेकिन उस समय मैं चौक गया और मेरा दिल काँपने लगा, लेकिन दूसरी ही पल वो गायब हो गया था। 

दरवाजा गोपा ने खोला, उसे देख कर मेरा दिल रुक सा गया। मेरे आने की खबर पा कर, उसने नई साड़ी पहन ली थी और बाल भी बना लिए थे। लेकिन 2 साल में जो उसने सहा था उसे कैसे छुपाती? औरतों की जिंदगी में यह वह समय होता है जब वह सबसे सुंदर दिखती हैं। जब उनके लड़कपन और बचपने की जगह आकर्षण और सुंदरता आ जाती है। लेकिन गोपा की जवानी बीत चुकी थी। उसके चेहरे पर झुर्रियां और दुख की लकीरें थी, जिसे उसकी खुश दिखने की कोशिश भी छुपा नहीं पा रही थी। उसका शरीर बूढ़ा हो गया था और बाल सफेद होने लगे थे।

मैंने दुखी आवाज में पूछा- क्या तुम बीमार थीं, गोपा?

गोपा ने दुख छुपा कर कहा- नहीं तो, मुझे कभी सिर दर्द भी नहीं हुआ।

‘तो तुम्हारी यह क्या हालत है? बिल्कुल बूढ़ी हो गयी हो।’
‘तो जवानी लेकर करना ही क्या है? मेरी उम्र भी तो पैंतीस के ऊपर हो गयी!

‘पैंतीस की उम्र तो बहुत नहीं होती।’

‘हाँ उनके लिए जो बहुत दिन जीना चाहते है। मैं तो चाहती हूँ जितनी जल्द हो सके मर जाऊँ। बस सुन्नी के शादी की चिंता है। इससे छुटटी पा जाऊँ; मुझे जिन्दगी की परवाह न रहेगी।’

अब पता चला कि जो आदमी उस मकान में किराए से रहते थे। वह कुछ ही दिन बाद ट्रांसफर होके चले गए थे, तब से उन्हें कोई दूसरा किराएदार नहीं मिला। यह जान कर मेरा दिल टूट गया। इतने दिन इन बेचारों का खर्चा कैसे चला यह सोच कर ही बहुत दुख होता है।

मैंने उखड़े मन से कहा- लेकिन तुमने मुझे बताया क्यों नहीं? क्या मैं बिलकुल गैर हूँ?
गोपा ने शर्मिंदा होकर कहा- नहीं नहीं यह बात नहीं है। तुम्हें गैर समझूँगी तो अपना किसे समझूँगी? मैंने सोचा विदेश में तुम्हारी अपनी परेशानी होंगी तो तुम्हें परेशान क्यों करूँ? किसी न किसी तरह दिन कट ही गये। घर में और कुछ न था, तो थोड़े-से गहने तो थे ही। अब सुनीता की शादी की चिंता है। पहले मैंने सोचा था, इस मकान को बेच दूँगी, बीस-बाइस हजार मिल जायेंगे। शादी भी हो जायेगी और कुछ मेरे लिए बचा भी रहेगा; लेकिन बाद को मालूम हुआ कि मकान पहले ही गिरवी हो चुका है और उस पर सूद मिलाकर बीस हजार हो गये हैं।

महाजन ने यह एहसान किया कि मुझे घर से नहीं निकाला। इधर से तो अब कोई आशा नहीं है। बहुत हाथ पाँव जोड़ने पर संभव है, महाजन से दो ढाई हजार मिल जाये। इतने में क्या होगा? इसी फिक्र में घुली जा रही हूँ। लेकिन मैं भी कितनी मतलबी हूँ, न तुम्हें हाथ मुँह धोने को पानी दिया, न कुछ खाने के लिए लायी और अपना दुखड़ा लेकर बैठ गई। अब आप कपड़े उतारिये और आराम से बैठिये। कुछ खाने को लाऊँ, खा लीजिए, तब बातें हों। घर पर तो सब कुशल है?

Puri Kahani Sune…

Feeling Good : The New Mood Therapy (English)

Feeling Good : The New Mood Therapy (English)

“What will you learn from this summary?

 

Do you feel depressed? Do you think that you are worthless and that there's no point in living? Dr. David Burns has created this book to help you get better. You don't need any drugs or hospitalization. You can use Cognitive Therapy on your own to beat the mental illness. Depression is easy and quick to cure if you just know the right method. Many people have done it, and you can do it too.

 

Who should read this summary?

 

Anyone who is feeling down, patients who are suffering from depression and who are looking for an effective cure, and to therapists who want to help their patients using Cognitive Therapy

 

About the author

 

David Burns is a professor and psychiatrist from Stanford University. He popularized Cognitive Therapy and created the Burns Depression Checklist. Dr. Burns' lectures and studies have helped a lot of patients and therapists around the world. He has received several awards for his work.

Rich Dad Poor Dad (English)

Rich Dad Poor Dad (English)

“About the Author:-

 

Robert Toru Kiyosaki (born April 8, 1947) is an American businessman and author. Kiyosaki is the founder of Rich Global LLC and the Rich Dad Company, a private financial education company that provides personal finance and business education to people through books and videos. 

 

Who should read this book:-

 

1) Parents

2) Basically anyone interested in Financial Education

(hindi) The Adventure of the Engineer’s Thumb

(hindi) The Adventure of the Engineer’s Thumb

“हमारी करीबी दोस्ती के दौरान, मेरे दोस्त शरलॉक होम्स के सामने जितने भी केस आये, उनमें से सिर्फ दो ही मेरे द्वारा उसके सामने लाये गए थे, जिसमे से एक था मिस्टर हैदर्ली का अंगूठा और दूसरा कर्नल वॉरबटन का पागलपन. इनमें से दूसरा वाला ज्यादा मुश्किल था, लेकिन पहले वाला इतना अजीब और ड्रामेटिक था कि शायद उसे रिकॉर्ड में लाना ज्यादा जरूरी है, यहाँ तक की इसने मेरे दोस्त को भी बहुत कम सुराग दिए, उसके उस जासूसी हुनर के बावजूद जिसकी बदौलत उसे अच्छे परिणाम मिले हैं।

मुझे लगता है कि इस कहानी को एक से ज्यादा बार अखबार में छापा गया है, लेकिन, ऐसी कहानियाँ एक पेज पर आधे कॉलम में छपने से उस तरह असरदार नहीं होतीं जिस तरह तब होती है जब फैक्ट्स धीरे धीरे आपके सामने आते है, और जैसे जैसे नयी जानकारी आपको पूरे सच की तरफ लेकर जाती है वैसे वैसे रहस्य से पर्दा गिरने लगता है। उस वक्त के हालात ने मुझपर एक गहरा असर छोड़ा है और दो साल होने के बाद भी उसका असर काम नहीं हुआ है। 

ये 89’ की गर्मियों की बात है, मेरी शादी को ज्यादा समय नहीं हुआ था, जब वे घटनायें हुई जिनके बारे में मैं आपको अभी बताने वाला हूँ। मैं अपनी सिविल की प्रैक्टिस के लिए लौट आया था और होम्स को उसके बेकर स्ट्रीट वाले घर में छोड़ आया था, हालांकि मैं उससे मिलने जाता रहता था और कभी कभी मैं उसे उसकी Bohemian वाली आदतों को छोड़ने और हमसे आकर मिलने के लिए बोलता था. मेरी प्रैक्टिस बढ़ गयी थी और क्योंकि मैं पैडिंगटन स्टेशन से ज्यादा दूर नहीं रहता था, मेरे पास वहाँ के कई अफसर भी इलाज के लिए आते थे। उनमे से एक ऐसा आदमी था, जिसका मैंने लंबे समय से चल रही एक दर्दनाक बीमारी का इलाज किया है, वह कभी भी मेरी तारीफ करते थकता नहीं था और हर उस पीड़ित इंसान को मेरे पास भेजता, जिसे वह भेज सकता था। 

एक सुबह, सात बजने से थोड़ा पहले, मैं नींद से उठा गया जब मेरी मेड ने दरवाज़ा खटखटाया और बताया कि पैडिंगटन स्टेशन से दो आदमी आये हैं और वे कंसल्टिंग रूम में मेरा इंतज़ार कर रहे है। मैंने जल्दी से कपड़े पहने और नीचे गया, क्योंकि मेरे अनुभव की वजह से मुझे पता था कि रेलवे के केस कभी भी मामूली नहीं होते। जैसे ही मैं नीचे उतरा, मेरा पुराना सहयोगी, गार्ड, कमरे से बाहर आया और अपने पीछे का दरवाज़ा कस कर बंद कर दिया।
“मैं उसे यहाँ ले आया हूँ,” उसने अपने अँगूठे को अपने कंधे पर रखते हुए धीरे से कहा; “वह ठीक है।”

“तो फिर क्या बात है?” मैंने पूछा, क्योंकि उसे देख कर लग रहा था जैसे उसने किसी अजीब से प्राणी को मेरे कमरे में बंद कर रखा है।
“यह एक नया मरीज़ है,” उसने धीरे से कहा। “मैंने सोचा उसे खुद ही यहाँ ले आऊं; ताकि वो भाग ना सके। यहाँ है वो, पूरी तरह सही सलामत। अब मुझे चलना चाहिए, डॉक्टर; मुझे भी आपकी तरह अपने काम पर जाना है।” और वह भरोसेमंद इंसान चला गया, बिना मुझे थैंक यू बोलने का मौका दिए।

मैं अपने कंसल्टिंग रूम के अंदर गया और एक आदमी को वहाँ बैठे हुए देखा. उसने एक heather tweed का सूट पहना हुआ था, साथ में एक मुलायम कपड़े की कैप, जिसे उसने मेरी किताबों के ऊपर रखा हुआ था। उसने अपने एक हाथ पर रूमाल बाँधा हुआ था, जो पूरी तरह खून से सना हुआ था। वह जवान था, मेरे ख्याल से है 25 साल का होगा, उसका चेहरा मजबूत और मर्दाना था; लेकिन वो बिलकुल मुरझाया हुआ लग रहा था और ऐसा लग रहा था मनो जैसे कोई आदमी बड़ा बेचैन और तकलीफ में हो, और अपनी सारी ताकत लगाकर उसे सहन कर रहा हो।

“इतनी सुबह-सुबह आने के लिए माफ़ी चाहता हूँ, डॉक्टर,” उसने कहा, “लेकिन कल रात मेरे  साथ एक बहुत बुरा हादसा हुआ। मैं सुबह ट्रैन से आया, और जब मैंने पैडिंगटन स्टेशन पर पूछा की आस पास कोई डॉक्टर कहाँ मिलेगा, तब एक सज्जन आदमी मुझे यहाँ छोड़ गए. मैंने मेड को एक कार्ड दिया था, लेकिन मुझे लगता है उसने वो साइड वाली टेबल पर ही छोड़ दिया।” 

मैंने वह कार्ड उठाया और देखा। “मिस्टर विक्टर हैथरली, हाइड्रोलिक इंजीनियर, 16A, विक्टोरिया स्ट्रीट (3rd फ्लोर).” ये मेरे सुबह के मेहमान का नाम, पेशा और पता था। “माफ़ी चाहता हूँ, मैंने आपको इंतज़ार करवाया,” मैंने अपनी लाइब्रेरी-चेयर पर बैठते हुए कहा। “मैं समझता हूँ कि आप अपनेपनी रात के सफर से सीधा आये है, और मैं जनता हूँ, यह बड़ा बोरिंग हैं।”

“ओह, मेरी रात को बोरिंग नहीं कह सकते,” वह बोला और हंस पड़ा। वह अपनी चेयर पर झुकते हुए और खुद को हिलाते हुए वह जोर से हंसा। इस हंसी को देखकर मेरा सारा मेडिकल का ज्ञान जाग गया.
“रुक जाओ ! मैं चिल्लाया; “अपने आप को संभालो!” मैंने जग में से थोड़ा पानी निकला.

हालांकि, इससे कुछ फर्क नहीं पड़ा। उसे एक ऐसे पागलपन का दौरा पड़ा था जो किसी बड़े संकट के आने और उसके गुजर जाने के बाद होता है। कुछ देर बाद वह अपने असल रूप में आया, थका और सुस्त चेहरा लिये।
“मैं खुद को बेवक़ूफ़ बना रहा था,” वह हांफते हुए बोला। 
“बिलकुल भी नहीं। इसे पी लो।” मैंने पानी में थोड़ी ब्रांडी मिलाई, और उसे पीने के बाद उसके मुरझाये चेहरे पर थोड़ी रंगत आयी। 
“अब ठीक है!” उसने कहा। “और अब, डॉक्टर, शायद आपको मेरा अंगूठा देखना चाहिए या कहो की उस जगह को जहाँ अंगूठा हुआ करता था।” 

उसने अपना रूमाल हटाया और अपना हाथ निकाला। उसे देखकर मेरा मजबूत दिल भी दहल गया. वहाँ चार उभरी हुई उँगलियाँ थी और एक भयंकर लाल, स्पंजी जगह जहाँ अंगूठा होना चाहिए था। उसे या तो काटा गया था या फिर जड़ से उखाड़ा गया था. 
“हे भगवान!” मैं चिल्लाया, “ये बहुत गहरा जख्म है। जरूर बहुत खून बहा होगा।”

“हाँ, बहा था। उसके बाद मैं बेहोश हो गया था और मुझे लगता है मैं काफी देर तक होश में नहीं था। जब मुझे होश आया, मैंने देखा कि तब भी खून बह रहा था, इसलिए मैंने इसे अपने रूमाल से कसकर कलाई पर बाँध लिया और इसे एक लकड़ी का सहारा दे दिया।”
“बहुत अच्छा! आपको एक सर्जन होना चाहिए था.”
“देखो, ये हाइड्रोलिक्स की बात है और यह मेरे काम के दायरे में ही आता है।”
“ये एक बहुत भारी और नुकीली चीज से हुआ है।” घाव को देखते हुए मैंने कहा. 

“एक बड़े चाकू जैसी चीज से,” उसने कहा.
“मुझे लगता है ये एक एक्सीडेंट है। है ना?”
“बिलकुल भी नहीं।”
“क्या! एक जानलेवा हमला?”
“हाँ बिल्कुल।”
“आप मुझे डरा रहे हो।”
मैंने उस घाव को साफ किया, दवाई लगाई और आखिर में रुई से उसे ढका और पट्टी से बांध दिया. वह बिना हिले पीछे बैठा रहा, बस कभी कभी अपने होठ काट लेता था। 
“कैसा लग रहा है?” मैंने अपना काम पूरा करके पूछा। 
“बहुत अच्छा! आपकी ब्रांडी और पट्टी के बाद, मैं एक नए इंसान जैसा महसूस कर रहा हूँ. मैं बहुत कमजोर था, लेकिन मुझे एक अच्छी डील मिली थी.”
“शायद अभी आपको उस मामले के बारे में नहीं बात करनी चाहिए। ये बात जरूर तुम्हे बहुत परेशान कर रही है।”

“अरे नहीं, अब नहीं। अब शायद मुझे ये सब पुलिस को बताना पड़ेगा; लेकिन ये हम दोनों के बीच की बात है, अगर मेरा घाव इतना गहरा नहीं होता तो, मुझे लगता है वे मेरी बात नहीं मानते, क्योंकि ये बहुत असाधारण सी बात है और इसे साबित करने के लिए मेरे पास ज्यादा सबूत भी नहीं है; और अगर वो मेरी बात मान भी ले, तो जो भी सबूत मैं उनको दूंगा वो इतने साफ़ नहीं है की मुझे लगता इंसाफ हो पायेगा।”

“हा! मैंने कहा, “अगर यह कोई  ऐसी मुश्किल है जिसे आप हल करना चाहते हैं, तो पुलिस के पास जाने से पहले मैं आपको अपने दोस्त मिस्टर शरलॉक होम्स  के पास जाने की सलाह दूँगा.”
“ओह, मैंने उनके बारे में सुना है,” उसने जवाब दिया, “और मुझे बेहद ख़ुशी होगी अगर वे इस मामले को अपने हाथ में लें, हालांकि, मुझे पुलिस के पास भी जाना होगा. क्या आप मुझे उनसे मिलवा सकते हैं ?”

“हाँ बिलकुल.  मैं तुम्हें खुद उनके पास लेकर जाऊँगा।”
“मैं आपका एहसानमंद रहूँगा.”
“हम कैब बुला लेते हैं और साथ चलते हैं। हम उनके साथ नाश्ता करने के लिए समय से पहुंच जायेंगे। क्या आप अभी चल पाएंगे ?” 
“हाँ; जब तक मैं उन्हें अपनी कहानी नहीं बता देता, मुझे चैन नहीं आएगा।” 
“फिर तो मेरा नौकर कैब बुला लेगा और मैं तुरंत आपके पास आता हूँ.” मैं भागकर ऊपर गया, अपनी पत्नी को जल्दी से कहानी बताई और पांच मिनट के अंदर हम कैब में थे, और मैं एक नए मेहमान के साथ बेकर स्ट्रीट के लिए चल पड़ा. 

शेरलॉक होम्स मेरी उम्मीद के मुताबिक, ड्रेसिंग गाउन पहने अपने सिटिंग-रूम में आराम से अख़बार पढ़ता हुआ, ब्रेकफास्ट से पहले वाली पाइप पी रहा था,  जो उसके कल के बचे हुए सिगार के टुकड़ों से बना हुआ था। उसने शांति से अपने मिलनसार अंदाज में हमारा स्वागत किया, उसने ताजे अंडे और रेशर मंगाए और हमारे साथ खाना खाया। जब हमने नाश्ता कर लिया, उसने हमारे नए मेहमान को सोफे पर बैठाया, उसके सर के नीचे एक तकिया रखा, और उसके पास एक ब्रांडी और पानी से भरा क्लास रख दिया।  

Puri Kahaani Sune…

(hindi) THE ADVENTURE OF THE BLUE CARBUNCLE

(hindi) THE ADVENTURE OF THE BLUE CARBUNCLE

“क्रिसमस के दूसरे दिन मेरे दोस्त शर्लाक होम्स ने मुझे अपने यहाँ बुलाया तो मैंने सोचा इसी बहाने उससे मिलके क्रिसमस की बधाई दे दूं. 
वो एक पर्पल ड्रेसिंग गाउन पहने सोफे पर बैठा था, पास ही सुबह के कई सारे अखबार रखे थे. काउच के पास ही एक लकड़ी की कुर्सी रखी थी जिसकी पीठ पर बड़ी पुरानी सी मुड़ी-तुड़ी एक हैट टंगी थी, हैट इतनी खस्ताहाल लग रही थी कि उसके किनारे कई जगह से कटे-फटे थे. पास ही एक लेंस ग्लास और चिमटा भी पड़ा था , शायद हैट की बारीकी से जांच-पड़ताल करने के लिए. 

“तुम बिजी तो नहीं हो, कहीं मैंने तुम्हे डिस्टर्ब तो नहीं कर दिया? ” मैंने पूछा.
“बिल्कुल नहीं. बल्कि मुझे ख़ुशी है कि तुम जैसा दोस्त मेरे पास है जिसके साथ मै हर टॉपिक डिस्कस कर सकता हूँ. वैसे ये मामला कुछ ख़ास नहीं मामूली है” उसने अपने पुराने हैट की तरफ अंगूठे का इशारा करते हुए कहा.
“ लेकिन इससे जुड़े कुछ पॉइंट्स हैं जो काफ़ी दिलचस्प है और हमारे लिए उसमें कुछ चेतावनी भी है ” 

मै उसकी आराम कुर्सी पर बैठ गया और अपने ठंड से कांपते हाथ आग के सामने रखे. ठंड इतनी थी कि खिड़कीयों पर बर्फ की मोटी परत सी जम गयी थी और बाहर घने कोहरे की चादर सी लिपटी थी.   
“मुझे लगता है कि ये कहानी बेशक घरेलू लग रही है पर इसमें कोई डीप मिस्ट्री छुपी है —यही वो क्लू है जो तुम्हे इसका हल और गुनहगार को उसके किये की सजा देगा” मैंने कहा. 
“नहीं, नहीं, कोई क्राइम नही है”हंसते हुए होम्स  बोला. 

“वही सब सनकपन की हरकते और क्या? चालीस लाख की आबादी वाले शहर में इतने लोग एक साथ रहेंगे तो कोई ना कोई हादसा या दुर्घटना तो होगी. कई सारी छोटी-मोटी प्रोब्लम्स ऐसी होती है जो एकदम से हमारा ध्यान खींच लेती है पर हमे उनके अंदर छुपा क्राइम नहीं दीखता. ऐसे केसेस तो हमने देखे भी है” 

“हाँ, बहुत सारे देखे है. बल्कि पिछले छेह केसेस जिन्हें मैंने नोट करके रखा है, उनमे से तीन केस तो एकदम क्राइम फ्री थे” 

“तुम सही बोल रहे हो. तुम्हारा इशारा शायद इरेने एडलर पेपर्स की तरफ है जो मै रिकवर करने की कोशिश कर रहा हूँ, मिस मैरी सुथेरलैंड के इकलौते केस और एडवेंचर ऑफ़ द मेन विद ट्विस्टेड लिप वाले केस का. वेल, मुझे ज़रा भी शक नही कि ये छोटा सा मामला भी एकदम इनोसेंट निकलेगा. तुम पीटरसन, कमिश्नरी को तो जानते हो ना ?  
“हां”

“दरअसल ये ट्रोफी उसी की है” 
“ये उसकी हैट है क्या?’ 

“नहीं, ये उसे मिली थी. पता नहीं किसकी हैट है. पर मेरी तुमसे रिक्वेस्ट है कि तुम इस केस को एक इंटेलेक्चुअल प्रोब्लम की तरह देखो. सबसे पहले सुनो ये यहाँ कैसे पहुंची. ये क्रिसमस की सुबह कंपनी में एक मोटी ताज़ी बतख के साथ आई, और मुझे पूरा यकीन है कि वो बत्तख इस वक्त पीटरसन के सामने आग में भूनी जा रही होगी. तो बात ये है कि: क्रिसमस वाले दिन सुबह चार बजे पीटरसन जोकि तुम्हे मालूम ही है, कितना ईमानदार आदमी है, एक छोटी सी पार्टी से टोनम,कोर्ट रोड में अपने घर लौट रहा था (Tottenham Court Road.) कि तभी उसने गैसलाईट की रौशनी में एक लंबे से आदमी को देखा जो थोडा लंगड़ा के चल रहा था और अपने कंधो पर एक बत्तख लेकर जा रहा था.

गूज स्ट्रीट (Goodge Street) के पास इस आदमी का कुछ गुंडों से झगड़ा हो गया तो उनमे से एक गुंडे ने इस आदमी की हैट हवा में उछाल दी, उस आदमी ने जब अपनी छड़ी घुमाकर खुद को बचाने की कोशिश की तो छड़ी सीधे जाकर एक दुकान  की खिड़की पर गिरी और शीशा टूट गया. पीटरसन गुंडों से उस आदमी को बचाने दौड़ा लेकिन वो आदमी खिड़की का टूटा शीशा देखकर काफी घबरा गया था. ऊपर से यूनीफोर्म में पीटरसन को अपनी तरफ आते देख वो डर के मारे बतख को वही छोडकर भाग खड़ा हुआ और टोनम कोर्ट रोड के पीछे की गलियों में जाकर गायब हो गया. पीटरसन के पहुँचने तक गुंडे भी भाग गए थे, अब बेचारे पीटरसन के सामने एक मासूम सी बत्तख और एक फटी-पुरानी सी हैट पड़ी थी”

“तो ज़ाहिर है उसने वो दोनों चीज़े उनके मालिक तक पहुंचा दी होंगी?’ 
“माई डियर, यही तो प्रोब्लम थी हालांकि उस बतख की बाई टांग पर एक छोटा सा कार्ड बंधा था जिसमे लिखा था” मिसेज हेनरी बेकर के लिए” और ये भी सच है कि हैट के अंदर की तरफ एच. बी. लिखा हुआ था पर इस शहर में कई हज़ार लोग होंगे जिनका सरनेम बेकर है और उनमे से कई सारे हेनरी बेकर होंगे, ऐसे में किसी का खोया सामान वापस करना इतना आसान काम नहीं है.”

“अच्छा, तो फिर पीटरसन ने क्या किया?’ 

“वो क्रिसमस के दिन बत्तख और हैट दोनों मेरे पास लेकर आया. उसे पता है मुझे छोटी से छोटी प्रोब्लम में भी बड़ा इंटरेस्ट रहता है. बतख तो हमने सुबह तक यूं ही रखी थी, फिर ठंड बढने लगी तो हमे लगा अब इसे बिना देर किये खा लेना चाहिए तो भई, जिसे बतख मिली थी वो उसे ले गया और मेरे पास रह गयी ये हैट! पता नही किस बेचारे की होगी जिसका क्रिसमस डिनर भी उसके हाथ से निकल गया” 
“क्या उसने कोई इश्तहार नही दिया?’ 
“नहीं” 
“तो फिर उसकी पहचान कैसे होगी?’ 
“कोशिश करते है जितनी भी जानकारी मिल सके?’ 
“इस हैट से?’ 
“बिल्कुल” 

“मज़ाक कर रहे हो? इस फटी-पुरानी हैट से तुम्हे क्या पता चलने वाला है?’ 
“ये रहे मेरे लेंस. तुम मेरा मेथड जानते हो. देखो जरा इस हैट से इसके पहनने वाले के बारे में क्या इन्फोर्मेशन मिल सकती है ?’ 
मैंने हैट को अपने हाथ में लेकर चारो तरफ से घुमाकर देखा. क्या खास था इस हैट में भला ? एक सिंपल सी गोल काले रंग की टोपी थी. अंदर लाल कपड़े की लाईनिंग लगी थी जो काफी हद तक बदरंग थी और कोई लेबल भी नहीं लगा था जिससे बनाने वाले का नाम पता चलता. लेकिन जैसा होम्स  ने कहा, दो इनिशियल्स लिखे थे एच. बी.” पर इलास्टिक गायब थी. बाकि, हैट काफी पुरानी और गंदी थी,कई जगह से रंग उड़ा हुआ था जिस पर स्याही लगाकर छुपाने की कोशिश की गयी थी.  
“मुझे तो कुछ नही दिख रहा” मैंने हैट अपने दोस्त को वापस करते हुए कहा. 

“बल्कि इसके उलट, वॉटसन अगर तुम देखना चाहो तो इसमें काफी कुछ दिख रहा है, पर तुम अंदाजा लगाने में बड़े कमज़ोर हो” 
“तो फिर तुम ही बता दो कि इस हैट से तुमने क्या अंदाजा लगाया ?’ 

वो हैट उठाकर अपने टीपिकल अंदाज में बड़ी देर तक उसे गौर से देखता रहा. 
“शायद ये हैट उतना भी इशारा नही करती जितना कि कर सकती थी. पर इसके बावजूद इसमें कुछ ख़ास बात ज़रूर है जिससे काफी कुछ पता चल सकता है, काफी अंदाजे लग सकते. पहला तो ये कि जिसकी ये हैट है वो काफी इंटेलेक्चुअल टाइप का आदमी है और दूसरा कि पिछले तीन सालो में उसकी माली हालत काफी अच्छी रही होगी, हालाँकि आजकल पैसे की तंगी झेल रहा है. वैसे तो ये आदमी काफी समझदार लगता है और दूर की सोचता है पर शायद पैसे की तंगी ने इसे शराबी बना दिया है. और शायद इसीलिए इसकी बीवी भी अब इसे प्यार नही करती” 

“माई डियर होम्स! 
होम्स मेरी तरफ ध्यान दिए बगैर बोलता रहा “पर इसने अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट अभी खोई नहीं है. ये आदमी ज्यादा एक्टिव नहीं है, घर से बाहर कम ही निकलता है इसलिए फिजिकली ज्यादा फिट नही है, बीच की उम्र है, बाल सफेद है और कुछ दिन पहले ही कटवाए गए है, बालो में लाइम क्रीम लगाता है और एक जरूरी बात, इस आदमी के घर में गैस बर्नर नहीं है” 

“तुम मजाक के मूड में लग रहे हो, होम्स ” 
“जरा भी नहीं. जब मैंने तुम्हे इतना कुछ बताया तो क्या तुम्हे अभी भी समझ नही आया?’ 
“मुझे मालूम है, मै इतना इंटेलिजेंट नही हूँ पर एक बात बता दूं, मुझे तुम्हारी इन बे सिर-पैर की बातो पर यकीन नही है. ये तुमने कैसे कहा कि वो आदमी इंटेलेक्चुअल है?’ 
जवाब में होम्स  ने हैट अपने सिर पे रख लिया. हैट उसके माथे से निकल कर उसके नाक के ऊपर आ गया था, 
“जिस आदमी का सिर इतना बड़ा है, वो जरूर दिमाग वाला होगा” 

“और वो अमीर से गरीब होने वाली बात?’ 
“ये हैट तीन साल पुरानी है. उन दिनों हैट का यही फैशन था, फ्लैट किनारे वाली साइड से मुड़ी हुई. और ये हैट एकदम बेस्ट क्वालिटी की है. देखो, ये सिल्क का बैंड और बढ़िया क्वालिटी की लाईनिंग. अगर ये आदमी तीन साल पहले ऐसी महंगी हैट खरीद सकता था तो मतलब ये तब अमीर रहा होगा, और तब से नई हैट नहीं ली, यही हैट घिस रहा है यानी आजकल गरीबी में जी रहा है” 
“वेल, ये बात तो सच लगती है, पर दूर की सोच और शराब की लत का पता कैसे चला?’ 
होम्स  हँसा“

“ ये रही दूर की सोच” उसने अपनी अंगुली से हैट सिक्योरर की छोटी सी डिस्क और लूप की तरफ इशारा करते हुए कहा. 
“ ये चीज़े हैट के साथ नहीं बिकती इसलिए इसने हैट सिक्योरर खरीदा था ताकि कहीं तेज़ हवा में सिर से हैट ना उड़ जाए पर क्योंकि हैट की इलास्टिक टूटी हुई है और उसने इसे ठीक नहीं कराया तो इसका मतलब आजकल वो थोडा लापरवाह हो गया है. वही दूसरी तरफ उसने स्याही से हैट के उड़े रंग को छुपाने की कोशिश की है तो इसका मतलब उसमें अभी भी काफी सेल्फ रिस्पेक्ट की फीलिंग है”

“तुम्हारी बात में दम है” मैंने कहा. 
“रही बात उसकी मिडल एज की और सफेद बाल जो उसने आजकल में ही कटाए है और लाइम क्रीम इस्तेमाल करने की बात तो ये सारी चीज़े मुझे हैट की लाईनिंग के नीचे वाले हिस्से को गौर से देखने के बाद मालूम पड़ी. मैंने लेंस से देखा तो मुझे बहुत सारे छोटे-छोटे कटे बाल मिले जो नाई की कैंची से कटने के बाद रह जाते है और बालो में एक खास तरह की लाइम क्रीम की खुशबू भी है. और ये ब्राउन कलर की डस्ट देख रहे हो, ये सड़क की धूल नहीं है बल्कि घर के अंदर की धूल है जिससे साफ़ पता चलता है कि ये आदमी ज्यादातर घर में ही रहता है. हैट के अंदर से थोड़ी गीली भी है यानी इस आदमी को पसीना भी बहुत आता है” ..

Puri Kahani Sune…

You Are a Badass: How to Stop Doubting Your Greatness and Start Living an Awesome Life (English)

You Are a Badass: How to Stop Doubting Your Greatness and Start Living an Awesome Life (English)

“What will you learn from this summary?

 

All the negative beliefs you have about yourself are all lies. If you think you cannot be successful, rich, happy or attractive, then you are dead wrong. In this book, Jen Sincero will teach you how to love yourself more and to believe in what you can do. You will learn how to live in the moment, ignore criticisms and appreciate everything. The awesome life is within your reach. You just need to go and grab it.

 

Who should read this summary?

 

Couch potatoes; people who think they are broke, sad and ugly; people who are jobless or stuck in a job they don’t like; people who want to finally make a difference in their life.

 

About the Author

 

Jen Sincero is a success coach, motivational speaker and best-selling author. She encourages people to transform their lives through her books, newsletters, speaking events and seminars. Jen lives in Los Angeles, California but she travels all over the world to spread awesomeness. 
 

Sherlock Holmes: The Red-Headed League

Sherlock Holmes: The Red-Headed League

“ये पिछले साल की बात है. पतझड़ के मौसम में एक दिन मेरे दोस्त मिस्टर शर्लाक होम्स ने मुझे कॉल करके अपने ऑफिस में बुलाया. जब मैं वहां पहुंचा तो देखा कि वो किसी आदमी के साथ बातो में बिजी थे. जिस आदमी से वो बात कर रहा था वो छोटे कद का और गोलमटोल था. उसके गालो पर सेहत की लाली छाई थी और सिर के बाल भी एकदम लाल थे. मैंने अचानक आकर उन्हें डिस्टर्ब करने के लिए माफ़ी मांगी और जाने लगा कि तभी होम्स मुझे खींचते हुए रूम में ले गया और पीछे से दरवाजा बंद कर दिया. 

“बिल्कुल सही मौके पर आए हो, मेरे दोस्त वॉटसन ” होम्स मुझे देखते ही एक्साईट होकर बोला. 
“ओह, मुझे लगता है तुम अभी बिजी हो” मैंने कहा. 
“हाँ हूँ तो बल्कि कुछ ज्यादा ही बिजी हूँ” 
“ठीक है तो फिर मै अगले रूम में तुम्हारा वेट करता हूँ” 
“ इसकी जरूरत नहीं है. फिर उसने उस आदमी को मेरा इंट्रोडक्शन देते हुए कहा” मिस्टर विल्सन, इनसे मिलिए ये है मेरे फ्रेंड जो मेरे पार्टनर भी रह चुके है. इन्होने कई सक्सेसफुल केस सुलझाने में मेरी मदद की है और मुझे पूरी उम्मीद है कि आपके केस में भी मुझे इनकी जरूरत पड़ने वाली है” 
छोटे कद वाले आदमी ने अपनी कुर्सी से आधे उठकर मुझे ग्रीट किया. उसने अपनी छोटी और सवालिया नज़रों से मेरी तरफ देखा.  

“ बैठ जाओ! होम्स ने सोफे की तरफ इशारा करते हुए कहा. अपनी अंगुलीयों को आपस में सटाते हुए वो भी खुद आर्मचेयर पर बैठ गया. मै उसकी इस आदत से वाकिफ था. जब उसे किसी केस पर डिस्कस करना होता है तो वो इसी पोज में बैठता है. 
“ मै जानता हूँ माई डियर वॉटसन  कि तुम भी मेरी तरह नॉर्मल लाइफ से हटकर लगने वाली चीजों के शौकीन हो. और ये बात तुम प्रूव भी कर चुके हो मेरे साथ मेरे एडवेंचर में शामिल होकर. इनमें अपनी दिलचस्पी को तुमने इस जोश के साथ ज़ाहिर किया है जो तुम्हें इन किस्सों के बारे में लिखने के लिए इंस्पायर करता है और अगर तुम मुझे ऐसा कहने के लिए माफ़ करो तो मैं कहूँगा कि मेरे छोटे-छोटे बहादुरी वाले किस्सों को तुमने थोड़ा नरक मिर्च लगाकर लिखा है.” 

“ तुम्हारे केस तो वाकई बड़े दिलचस्प होते थे” मैं उसकी बातो से सहमत होते हुए कहा. 
“तुम्हे याद होगा, उस दिन जब मिस मैरी सदरलैंड  ने हमे अपनी एक सिंपल सी प्रोब्लम बताई थी तो मैंने कहा था” कि अजीबोगरीब प्रभावों और बिल्कुल अलग और अनोखे कॉम्बिनेशन के लिए हमें जिंदगी में झांकना होगा, जो हमेशा किसी भी इमेजिनेशन की कोशिश से ज़्यादा अनोखी और निराली होती है.” 
“हाँ और तुम्हारी इस बात पर मुझे ज़्यादा यकीन नहीं बल्कि पूरा शक था” 

“ हाँ, तुम्हे शक होता था डॉक्टर, पर अंत में तुम्हे मानना ही पड़ता था, क्योंकि मै तुम्हारे सामने इतने फैक्ट्स रखता था कि तुम भी सच से इंकार नहीं कर पाते थे. अब सुनो, मिस्टर जबेज़ विल्सन ने आज सुबह ही मुझे कॉल करके बुलाया और एक ऐसी कहानी शुरू की जिसकी शुरुआत ऐसी है जो अपने आप में बहुत अजीब होने का दावा करती है. तुमने तो मुझे कहते सुना ही होगा कि जो बाते बड़ी अजीब और अनोखी लगती है, वो किसी बड़े क्राइम से नही बल्कि छोटे क्राइम्स से जुड़ी होती है.

और अक्सर जहाँ किसी बात या किसी चीज़ को लेकर हमे डाउट होता है, वहां कोई ना कोई क्राइम का कनेक्शन जरूर होता है. और जहाँ तक मैंने सुना है, मै श्योर नही हूँ कि अभी का ये केस क्राइम केस है या नहीं पर जैसी घटनाएं घटी है उससे तो यही लगता है कि ये कुछ अलग टाइप का ही केस है. शायद मिस्टर विल्सन तुम्हे पूरी कहानी डिटेल में सुनाने की तकलीफ करे. ये मै आपसे इसलिए नही कह रहा कि मेरे दोस्त डॉक्टर वॉटसन  को इस कहानी की शुरुवात मालूम नहीं है बल्कि इसलिए भी ताकि मै आपके मुंह से एक-एक डिटेल फिर दोबारा सुन सकूं. अब जैसा कि मेरी आदत है, जब मुझे घटनाओं का हल्का सा भी आईडिया मिल जाता है तो मै अपनी मेमोरी में उससे मिलते-जुलते केसों को रीवाइंड करता हूँ. पर अभी की सिचुएशन में जो भी मुझे फैक्ट्स मालूम है वो मेरे हिसाब से एकदम यूनिक है”.

मिस्टर विल्सन ने बड़े गुरूर से मेरी तरफ देखा और फिर अपने कोट के अंदर वाली पॉकेट से एक गंदा सा मुड़ा-तुड़ा न्यूजपेपर निकाला. पेपर को वो अपने घुटनों पर फैलाकर थोडा आगे को झुके और एडवरटीज़मेंट वाले कॉलम  को गौर से देखने लगे. मैंने उन्हें ओब्ज़ेर्व कर रहा था, उनके कपड़ो और हाव-भाव से मै उनके बारे में जानना चाहता था कि वो इस टाइप के आदमी है. पर मुझे ज्यादा पता नही चल सका. मिस्टर विल्सन एक टिपिकल ब्रिटिश बिजनेसमेन थे, वैसे ही सुस्त-आलसी, मोटे और बड़बोले जो अपनी तारीफ खुद ही करते है.

वो ग्रे कलर की ढीली-ढाली चेक की पेंट और काला लॉन्ग कोट पहने हुए थे जिसके सामने के बटन खुले थे जो बहुत साफ़ सुथरा नहीं था और हलके भूरे रंग की वेस्टकोट पहन राखी थी जिस पर पीतल की भारी अल्बर्ट चेन लगी थी और एक चौकोर छेद में से एक ज़ेवर, जो मेटल का था, का एक पीस लटक रहा था. उनकी हैट काफी पुरानी और घिसी हुई लग रही थी. पीछे कुर्सी पर उनका ब्राउन ओवर कोट पड़ा था जिसका रंग काफी हद तक फेड हो चूका था और वेलवेट के कालर मुड़े हुए थे. कुल मिलाकर इस आदमी में ऐसी कोई खास बात नही थी सिवाए उसके लाल बालो वाले सिर के और हाव-भाव और चेहरे पर एक गहरी मायूसी के. 

शर्लाक होम्स की तेज़ आँखों ने मुझे मिस्टर विल्सन का जायजा लेते देख लिया था, वो मुझे देखकर हल्के से मुस्कुराया, उसने मेरी आँखों में शक पढ़ लिया था. उसने कहा: 
“ साफ़ और ज़ाहिर फैक्ट्स के अलावा कि किसी टाइम ये मैन्युअल लेबर  थे, और इन्हें तम्बाकू  सूंघने की आदत थी.ये एक सीक्रेट ग्रुप के मेंबर रह चुके है और चाइना में भी रहे हैं, हाल ही में इन्होने बहुत ज़्यादा लिखना भी शुरू किया है. इसके अलावा मैं और कोई अनुमान नहीं लगा सकता.” 

मिस्टर जाबेज़ विल्सन पेपर पर अपनी अंगुली टिकाये कुर्सी से उठ खड़े हुए, उनकी नजरे मेरे दोस्त पर जमी थी. 
“कैसे! आपने कैसे ये अंदाजा लगाया मिस्टर होम्स?’ आपको कैसे पता चल गया कि मै मैन्युअल लेबर भी करता था. ये बात सच है क्योंकि मैंने अपने करियर की शुरुवात शिप के कारपेंटर से की थी’मिस्टर विल्सन हैरानी से बोले. 

“ आपके हाथो को देखकर सर. आपका राईट हैण्ड लेफ्ट वाले से बड़ा है. क्योंकि आप राईट हैण्ड से सारा काम करते है इसलिए इसकी मसल्स ज्यादा डेवलप है” 
“ओह, पर तम्बाकू और सीक्रेट ग्रुप के मेंबर होने की बात ?’ 
“मुझे ये कैसे पता चला, ये बताकर मै आपकी इंटेलीजेन्स की इन्सल्ट नही करना चाहता खासकर जबकि आपके ऑर्डर के सख्त नियम  के खिलाफ आप एक आर्क और कंपास ब्रेस्टपिन का इस्तेमाल करते है”. 
“आह, मै तो भूल ही गया था! पर राईटिंग के बारे में आपको कैसे पता चला?” 

“आपकी राईट स्लीव पांच इंच ऊपर तक एकदम नई है पर लेफ्ट वाली कोहनी  के पास घिसी हुई है क्योंकि आप डेस्क पर ऊपर हाथ टिका कर रखते है, इससे तो यही ज़ाहिर होता है कि आप लिखते है” 
“ओके, पर ये कैसे पता लगा कि मै चाइना गया था? 

“ आपने अपनी दाई कलाई के ऊपर जो मछली का टैटू बनावाया है, वो सिर्फ चाइना में ही बनता है. मैंने टैटू मार्क्स की थोड़ी-बहुत स्टडी की है और इस बारे में किताबे भी पढ़ी है. चाइना के फिश टैटू की ख़ास बात ये है कि उसमे मछली के स्केल्स पिंक कलर के बनाते है. और इसके अलावा आपकी घड़ी की चेन से एक चाईनीज सिक्का भी लटक रहा है तो पक्की बात है कि आप चाइना जा चुके है” 

मिस्टर जाबेज़ विल्सन ने जोरो का ठहाका लगाया” वेल, मै कभी नहीं गया! “पहले मुझे लगा आप बड़े चालाक है पर लगता है आप धोखा खा गये” 
“ मै सोच रहा हूँ वॉटसन ” होम्स बोला” शायद मैंने एक्सप्लेन करने में गलती कर दी. ‘ओमने इग्नोटम प्रो मैगिफो (Omne ignotum pro magnifico),’ यह तुम जानते हो, अगर मै गलत निकला तो जो भी मेरी थोड़ी-बहुत रेपूटेशन बनी है, इस टूटे हुए जहाज़ की तरह, उसका सत्यानाश हो जाएगा अगर मैं ऐसे ही मुहंफट रहा तो .मिस्टर विल्सन आपको वो एडवरटीज़मेंट मिला क्या?”  

“हाँ ये रहा. मिस्टर विल्सन ने पेपर के एक कॉलम पर अपनी मोटी अंगुली रखते हुए कहा. यही से शुरुवात होती है. सर, आप ज़रा इसे पढ़िये” 
मैंने उनसे पेपर लिया और पढना शुरू किया: 
“टू द रेड हेडेड लीग: अमेरिका के लेबनन, पेनीसिलवेनिया के रहने वाले स्वर्गीय एज़ेकिया होपकिंस की वसीयत के हिसाब से एक जगज ख़ाली है जहाँ लीग के मेंबर को नाममात्र सर्विस के लिए हफ्ते में 4 पाउंड की सेलरी दी जाएगी. जितने भी इक्कीस साल से ऊपर के फिजिकली और मेंटली फिट रेड हेडेड लोग है इस पोस्ट के लिए मंडे, 11 बजे, 7 पोप्स कोर्ट, फ्लीट स्ट्रीट में स्थित लीग के ऑफिस में डंकनरॉस से ख़ुद आकर मिलें”. 

एडवरटीज़मेंट को दो बार पढने के बाद मैंने हैरानी से कहा: आखिर इस इश्तहार का मतलब क्या है?’ 
होम्स अपनी आदत के मुताबिक मजाकिया अंदाज में हंसा और जाकर अपनी कुर्सी पे बैठ गया. 

“कुछ एबनार्मल सा है, है ना?’ अब मिस्टर विल्सन, आप हमे शुरूवात से सब कुछ बताओ, अपने बारे में. आपका घर, आपकी फेमिली और इस एडवरटीज़मेंट से आपका क्या कनेक्शन है. और डॉक्टर तुम ये सारी इन्फोर्मेशन और डेट्स एक पेपर पर नोट करोगे” होम्स बोला. 
“आज से सिर्फ दो महीने पहले 27 अप्रैल की सुबह,1890 से इस घटना की शुरुवात हुई थी’ 
“बहुत अच्छे, अब आगे मिस्टर विल्सन?’ 

मिस्टर विल्सन अपना माथे पर हाथ फेरते हुए बोले: “वेल, जैसा कि मैं आपको बता रहा था मिस्टर शेर्लोक होम्स, शहर के पास ही मै कोबर्ग स्क्वायर में छोटा सा मनी लैंडिंग का बिजनेस चलाता हूँ. मेरा कारोबार ज्यादा बड़ा नहीं है, बस किसी तरह गुज़ारा चल रहा है. पहले मेरे पास दो असिस्टेंट्स थे पर अब मै एक ही रख सकता हूँ क्योंकि ज्यादा कमाई नही होती और मेरा वो असिस्टेंट मेरे पास काम सिखने आता है इसलिए मै उसे आधी सैलरी देता हूँ” 

“ उसका नाम विंसेंट स्पॉल्डिंग है (Vincent Spaulding,). उम्र में छोटा नहीं है बल्कि उम्र  क्या है, मुझे नहीं पता. मुझे कोई ज्यादा स्मार्ट असिस्टेंट नहीं चाहिए मिस्टर विल्सन, क्योंकि मुझे पता है कि उसे दूसरी जगह डबल सैलरी मिल सकती है पर उसे यहाँ कोई प्रोब्लम नहीं है तो मै भी उसे क्यों निकालूँ? 
“हाँ, और जरूरत भी क्या है? आप बड़े लकी है जो आपको हाफ सेलरी में एक अच्छा एम्प्लोई मिल गया है. वर्ना आजकल इतनी कम सेलरी में कौन काम करता है. मुझे नही पता कि आपका असिस्टेंट भी आपके एडवरटीज़मेंट की तरह जबर्दस्त है या नहीं” 

“ओह, उसमे कुछ कमियां भी है. उसकी फोटोग्राफी, तौबा,तौबा. जब देखो अपना कैमरा लिए घूमता है जबकि उसे पहले अपना दिमाग ठीक करना चाहिए. उसके बाद अपनी पिक्चर्स डेवलप करने वो अँधेरी कोठरी में घुस जाता है जैसे कोई खरगोश अपने बिल में. बस उसमे यही एक कमी है, बाकि वो एक अच्छा वर्कर है और आदमी भी अच्छा है”
“मतलब वो अभी भी आपके पास काम करता है?’ 

“हाँ सर. वो और एक चौदह साल की लड़की जो साफ़-सफाई और खाने पकाने का काम करती है.—बस यही दो लोग मेरे साथ रहते है. मेरी वाइफ मर चुकी है और कोई बाल-बच्चा भी नहीं है. बस हम तीनो रहते है. गुजर-बसर चल रही है और कुछ नहीं” 
“पहली चीज़ जिसने हमे सबसे पहले हैरान किया था, वो था ये एडवरटीज़मेंट. आठ हफ्ते पहले आज ही के दिन स्पॉल्डिंग  ऑफिस में ये पेपर लेकर मेरे पास आया था और उसने कहा:  
“‘मिस्टर विल्सन, काश मै एक रेड हेडेड मेन होता” 

“‘वो क्यों? मैंने पुछा. 
“‘क्यों, ये देखिए, लीग ऑफ़ रेड हेडेड मेन की एक और वेकेंसी निकली है. जिसे भी ये जॉब मिलेगी बड़ा लकी होगा. और मुझे लगता है कि उनके पास जितने लोग है उससे ज्यादा वेकेंसी है इसलिए ट्रस्टीज के समझ में नहीं आरहा कि इतने पैसों का क्या किया जाए. बस अगर मेरे बालों का रंग बदल जाता तो यहाँ एक बढ़िया सी नौकरी मेरे लिए तैयार है”.

“‘ऐसा क्यों? मैंने पुछा. देखिए, मिस्टर होम्स, मै एक घरेलू टाइप का आदमी हूँ और मेरा बिजनेस घर से ही चल जाता है. मुझे बाहर जाने की ज़रूरत नही पडती. कई बार तो मै हफ्तों घर से बाहर नही निकलता. तो इसलिए मुझे पता नही रहता कि आस-पास क्या हो रहा है” 

“‘तो क्या आपने पहले कभी लीग ऑफ़ रेड हेडेड मेन के बारे में नहीं सुना?’ उसने हैरानी से पूछा. 
“कभी नहीं” 
“‘क्यों, मुझे हैरानी है. जबकि आप खुद इस वेकेंसी के लिए अप्लाई कर सकते है” 

Puri Kahani Sune…

(hindi) The Adventure of the Speckled Band

(hindi) The Adventure of the Speckled Band

“पिछले आठ सालों में मैंने अपने दोस्त शरलॉक होम्स के तौर-तरीकों को स्टडी किया हैं. उनमें से कुछ 70 अजीब केसेस में मैंने जो नोट्स लिखे थे, उन्हें देखकर मैंने गौर किया कि कुछ केस तकलीफ देने वाले, कुछ हंसाने वाले, और कुछ तो बहुत ही अटपटे थे, लेकिन कोई भी केस सिंपल नहीं था. ये, शरलॉक का, अपने काम के लिए प्यार था, न कि सम्पत्ति बढ़ाने का जरिया. वो ऐसे किसी भी केस के इन्वेस्टीगेशन में हाथ नहीं डालता था जो अजीब या शानदार न हो. इन सब अलग-अलग केसेस में से, मुझे याद नहीं कि किसी केस में वो सारी बातें थी जिसे शरलॉक अपने केसेस में ढूंढ़ता था, जो सरी के फैमिली, स्टोक मोरान के रॉयलॉटखानदान के केस से जुडी थी.

ये उन शुरुवाती दिनों की बात थी जब हम बेकर स्ट्रीट में रूम शेयर करते थे और बैचलर लाइफ जीते थे,  मैंने शरलॉक के साथ काम करना शुरू किया ही था. शायद मैंने उस केस का रिकॉर्ड रखा हैं, पर उस दौरान मुझसे वादा लिया गया था कि मैं इस केस को सीक्रेट रखूँगा. पिछले ही महीने मैं इससे आज़ाद हुआ हूँ क्योंकि जिनके साथ मैंने ये वादा किया था, वे अपने वक्त से पहले ही गुज़र गई. अब शायद वो टाइम आ गया हैं जब मैं सबके सामने सच्चाई को ला सकता हूँ. मैं जानता हूँ कि डॉ. ग्रिम्सबी रॉयलॉट की मौत का सच, इस मामले का उतना नुकसान नहीं कर सकती जितना इसके बारे में फैली हुई अफवाह नुकसान पहुंचा रही हैं.
83 साल के, अप्रैल के शुरुवाती दिनों की, एक सुबह की बात हैं जब मैं अपने नींद से उठा तो देखा कि शरलॉक होम्स मेरे बेड के साइड में तैयार होकर खड़ा था. लेट उठना उसका रूल था और घड़ी की सुई बता रही थी कि अभी तो सिर्फ सवा-सात बजे थे. मैंने उसे हैरान होकर अपनी पलकें झपकाते हुए देखा. मैं थोड़ा नाराज़ भी हुआ क्योकिं मैं भी अपनी आदतों का पक्का था. 

“” तुम्हें इस वक्त जगाने के लिए माफ़ी चाहता हूँ वॉटसन,”” उसने कहा.”” लेकिन आज के दिन की यहीं बात हैं, मिसेज़ हडसन को आज जल्दी उठना पड़ा, उन्होंने मुझे उठाया और मैंने तुम्हें उठाकर अपना बदला लिया.””

 “”क्या हुआ, आग लगी हैं क्या?””

“”नहीं, एक क्लाइंट हैं. लगता हैं कोई यंग लेडी काफी हड़बड़ी में हैं जो मुझसे मिलना चाह रही हैं. वो सिटींग रूम में मेरा इंतज़ार कर रही हैं. सुबह के इस वक्त अगर कोई लेडी शहर में भटककर सोये हुए लोगों को जगा रहीं हैं, तो मुझे लगता हैं कि ज़रूर कोई अर्जेंट बात होगी. अगर ये मामला इंटरेस्टिंग निकला तो मुझे यक़ीन हैं कि तुम भी इसे शुरु से ही फॉलो करना चाहोगे. चाहे जो भी बात हो, मैंने सोचा कि मैं तुम्हें भी बुला लूँ और ये मौका दूँ. 

“” मेरे दोस्त, ये मौका मैं किसी भी हाल में नहीं छोडूंगा.””

मुझे और कोई बात इतनी ज़्यादा ख़ुशी नहीं देती जितनी मुझे होम्स के प्रोफेशनल इंवेस्टीगेशंस को फॉलो करने में और उन बातों की तारीफ करने में मिलती थी जिससे वो तेज़ी से नतीजों पर पहुँच जाता था, जल्दी से अंदाज़े लगा लेता था और फिर भी उसके सामने जो भी प्रॉब्लम आती थी उनमें लॉजिक ढूंढ़कर ही उन्हें सुलझाता था.  मैंने जल्दी से अपने कपड़े बदले और कुछ ही मिनटों में सिटींग रूम में अपने दोस्त का साथ देने पहुँच गया. वहाँ काले कपड़े पहने और अपने चेहरे को ढक कर एक लेडी खिड़की के पास बैठी थी. हम दोनों को देखकर वो कुर्सी से उठ खड़ी हुई.

“”गुड-मॉर्निंग, मैडम,”” होम्स ने खुशी से कहा. “मेरा नाम शरलॉक होम्स है. ये मेरे करीबी दोस्त और सहयोगी डॉ. वॉटसन हैं. इनके सामने आप वैसे ही फ्री होकर बात कर सकती हैं जैसा आप मुझसे करना चाहती हैं. हा ! मुझे ये देखकर खुशी हुई कि मिसेज़ हडसन कितनी समझदार हैं, उन्होंने आपके लिए ये आग जलाई हैं. प्लीज, इस आग के करीब बैठिए, मैं आपके लिए एक कप गर्म कॉफी मंगवाता हूँ. मैं देख रहा हूँ कि आप काँप रही हैं.””

“यह कंपकपी ठंड के कारण नहीं हैं,” लेडी ने अपनी सीट को बदलते हुए धीमी आवाज़ में कहा.

“”फिर क्या?””

“यह डर के कारण है मिस्टर होम्स, दहशत हो रही हैं मुझे.” ये कहते हुए उन्होंने अपने चेहरे से पर्दा उठाया और हम देख सकते थे कि वो वाकई बुरी हालत में थी. चेहरे से वो काफी थकी हुई लग रही थी, उनका रंग उड़ गया था और आँखे ऐसी डरी हुई लग रही थी जैसे कोई शिकार की गई जानवर की आँखें हो. उनके चेहरे और बॉडी को देखकर लगता था कि उनकी उम्र कोई तीस साल की रही होगी, लेकिन उनके बाल अभी से ही सफेद हो गए थे और उनके एक्सप्रेशन से लग रहा था कि वे परशान थी. होम्स ने लेडी पर फ़ौरन अपनी तेज़ नज़रें घुमाई.   

“”आपको डरना नहीं चाहिए,”” शरलॉक ने आगे बढ़कर, उनकी हिम्मत बढ़ाने के लिए हाथ थपथपाते हुए कहा. “मुझे इसमें कोई शक नहीं कि हम जल्द ही आपके मामले को ठीक करेंगे. मैं देख रहा हूं आप आज ही सुबह ट्रेन से आई हैं.”

“”आप मुझे पहचानते हैं?””

“”नहीं, लेकिन मैंने आपके बाएं ग्लव् की हथेली में रिटर्न टिकट के आधे भाग को देखा. आप आज बहुत सुबह-सुबह निकली थी, और आप कच्चे रास्ते से होकर, कुत्ता-गाड़ी में स्टेशन पर पहुंची हैं.””

लेडी ने मेरे दोस्त शरलॉक को घूर कर देखा.

“”माय डियर मैडम, इसमें कोई राज़ की बात नहीं हैं.”” शरलॉक ने मुस्कुराते हुए कहा. “आपकी जैकेट के लेफ्ट बाजू में कम से कम सात जगहों में कीचड़ लगी हुई है. ये निशान बिल्कुल ताजा हैं. एक कुत्ता-गाड़ी ही हैं जो उस तरह से कीचड़ फेंकती है और वो भी तब जब आप ड्राइवर के राइट साइड की ओर बैठते हैं. “”

“”आपके जो भी कारण हैं, आप पूरी तरह से सही हैं,”” लेडी ने कहा. “मैं छह बजे से पहले घर से निकली हूँ, छ: बीस में लेदरहेड पहुंची, और वॉटरलू से पहली ट्रैन लेकर यहाँ आई. सर, मैं इस स्ट्रेस को अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती ; अगर ऐसा ही रहा तो मैं पागल हो जाऊंगी. मेरे पास ऐसा कोई नहीं जिसके पास मैं जा सकूँ – कोई भी नहीं है सिवाय एक के जो मेरी परवाह करता हैं लेकिन वो बेचारे मेरे किसी काम के नहीं हैं. मैंने आपके बारे में सुना है मिस्टर होम्स, मैंने मिसेजफ़ैरिंटॉश से आप के बारे में सुना है जिनकी आपने ज़रूरत पड़ने पर कभी मदद की थी. मुझे आपका पता उन्हीं से ही मिला हैं. ओह, सर, क्या आप मेरी मदद नहीं कर सकते? कम से कम जिन काले अँधेरे बादलों ने मुझे घेर रखा हैं उसमें ही कोई रोशनी डाल दीजिए. अभी तो मेरे हालात ऐसे नहीं हैं कि मैं आपकी सर्विस के बदले में कुछ दे सकूँ लेकिन एक महीने या छह हफ्ते में मेरी शादी हो जाएगी. फिर मेरी सम्पत्ति का कंट्रोल मेरे हाथों में होगा और तब मैं आपका उधर उतार पाउंगी.””

होम्स अपनी डेस्क की ओर मुड़ा, उसे खोलकर एक छोटी सी केस-बुक निकाली और उसमें इनफार्मेशन देखा.

“” फ़ैरिंटॉश,”” शरलॉकने कहा. “आह हाँ, मुझे ये मामला याद है, ये एक ओपल टियारा का मामला था. मुझे लगता है कि ये तुम्हारे आने से पहले की बात थी, वॉटसन. मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि मैडम, मैं आपके मामले की उसी तरह केयर करूँगा जैसे मैंने आपके दोस्त के मामले में की थी. और, जहां तक इनाम की बात हैं, मेरा काम ही मेरा इनाम है, इस काम में मेरे जितने भी खर्चे होंगे, जब भी मौका मिले आप चाहे तो उसे चुका सकती हैं. और, अब आप प्लीज़ अपनी सारी बात बताइए ताकि हम आपके मामले में कोई राय बना सकें.”

हमारे मेहमान ने कहा, “”आह! मेरी हालत की ज़िम्मेदार मेरा डर और मेरा शक हैं. इनके पीछे क्या कारण हैं, ये साफ़ ही नहीं हैं. कुछ छोटी-छोटी बातें हैं जो इतनी मामूली हैं कि जिनसे मैं कोई सलाह मांग सकती थी, उन्हें भी लगता हैं कि ये एक डरी हुई औरत की सोच हैं और कुछ भी नहीं. वो ऐसा मुझसे कहते तो नहीं हैं लेकिन मैं उनके टालमटोल करती नज़रों को पढ़ सकती हूँ. मैंने सुना है, मिस्टर होम्स, कि आप इंसान के दिल की गहराई में छिपे बेहिसाब बुराई के परतों को भी देख सकते हैं. आप मुझे सलाह दीजिए कि कैसे मैं उन खतरों के बीच चलूँ जो मुझे घेरे हुए हैं.””

“”मैं आपकी बात ध्यान से सुन रहा हूँ, मैडम.””

“”मेरा नाम हेलेन स्टोनर है, और मैं अपने सौतेले पिता के साथ रहती हूँ, जो इंग्लैंड के सबसे पुराने सैक्सन परिवार में से एक के आखिरी वारिस है. ये सरी के वेस्टर्न बॉर्डर पर स्टॉक मोरन के रॉयलट्स हैं.””

होम्स ने अपना सिर हिलाया. “”ये नाम मेरे लिए जाना पहचाना हैं, “” शरलॉक ने कहा.

“एक समय में ये फैमिली इंग्लैंड में सबसे अमीर था, और उनकी जायदाद नार्थ में बर्कशायर और वेस्ट में हैम्पशायर के बॉर्डर तक फैली हुई थी. हालाँकि, पिछले सौ सालों में, एक के बाद एक चारों वारिस ऐयाश और पैसे उड़ाने वाले मिज़ाज़ के निकले. और, आखिर में फैमिली को खत्म करने में जो भी रही सही कसर थी, वो एक जुआरी ने पूरी कर दी. कुछ एकड़ जमीन के और दो सौ साल पुराने घर के सिवाय कुछ भी नहीं बचा. ये घर भी भारी -भरकम उधार के बोझ तले गिरवी पड़ी हुई हैं.

आखिरी जमींदार ने जैसे-तैसे वहां एक खानदानी भिखारी के जैसे ज़िन्दगी जी, लेकिन उनके इकलौते बेटे जो कि मेरे सौतेले पिता हैं, उन्होंने सोचा कि उन्हें नए हालातों के हिसाब से चलना चाहिए. ये सोचकर उन्होंने एक रिश्तेदार से एडवांस पैसे लिए जिससे उन्होंने मेडिकल की डिग्री हासिल की और वे कलकत्ता चले गए. अपनी शख्सियत के दम पर और अपने स्किल के कारण उन्होंने कलकत्ता में बहुत बड़ी प्रैक्टिस बना ली थी.  हालांकि, उनके घर में हुई कुछ डकैतियों के कारण, एक बार गुस्से में उन्होंने अपने बटलर को पीट-पीट कर मार डाला था जिसके बाद किसी तरह से वे फाँसी से बचे थे. जिस तरीके का वो केस था, उन्हें काफी टाइम तक जेल में रहना पड़ा जिसके बाद वे उदास और निराश होकर इंग्लैंड लौट आए.

“जब डॉक्टर रॉयलॉट इंडिया में थे तो उन्होंने मेरी माँ से शादी कर ली थी. उन दिनों मेरी माँ, मिसेज़ स्टोनर, बेंगल आर्टिलरी के मेजर-जनरल स्टोनर की यंग विधवा थी. मेरी बहन जूलिया और मैं जुड़वाँ बच्चे थे, और मेरी माँ की दूसरी शादी के दौरान हम दोनों सिर्फ दो साल के थे. हमारी माँ के पास काफी पैसा था जो एक साल में 1000 पाउंड से कम नहीं था. हमारी माँ ने वसीयत में इन पैसों का हक मिस्टर रॉयलॉटको दिया था और हम सब उन्हीं के साथ रहते थे.

ये इंतज़ाम हुआ था कि उन पैसों में से कुछ पैसे हम दोनों बहनों को हमारी शादी के बाद हर साल दिया जाएगा. इंग्लैंड लौटने के कुछ टाइम बाद मेरी मां गुज़र गई. आठ साल पहले क्रेव के पास एक ट्रैन एक्सीडेंट में वो गुज़री थी. उसके बाद, डॉ. रॉयलॉट ने लंदन में डॉक्टरी की प्रैक्टिस फैलाने की कोशिश छोड़ दी और स्टॉक मोरन में अपने पुराने खानदानी घर में हमें खुद के साथ रखने के लिए ले गए. मेरी माँ ने जो पैसे छोड़े थे, वो हम सभी की ज़रूरतों के लिए काफी था और ऐसा लगता था कि हमारी खुशियों के बीच अब कुछ नहीं आ सकता.””

Puri Kahani Sune

 

12 Rules for Life (English)

12 Rules for Life (English)

“What will you learn from this summary?

 

In this book, you will learn 12 rules which will become your antidote for chaos. Your life may be a mess right now, but if you apply these rules, you can start picking up the pieces. You can find light in the dark and bring order to your life. This book will help you find hope and purpose. 

 

Who should read this book?

 

•    People caught up in the chaos of life
•    People suffering from many problems
•    People who feel lost and alone

 

About the Author

 

Jordan Peterson is a clinical psychologist. He is also a professor at the University of Toronto. His book, 12 Rules for Life, is an international best-seller. Dr. Jordan continues to help people find order in life through his blogs, podcasts, and online courses.