“यह साल 95 की बात है, उस समय कुछ कारणों के चलते, जिन्हें यहाँ बताने की जरुरत नहीं है, मुझे और मिस्टर शरलॉक होम्स को अपने शहर की महान यूनिवर्सिटी में रहना पड़ा, उस समय हमारे सामने एक छोटी मगर अजीब घटना हुई, जिसे मैं बताने जा रहा हूँ। यह जाहिर है कि इस घटना की कोई भी ऐसी जानकारी जो इसे पढ़ने वालों को कॉलेज या अपराधी की एकदम सही पहचान करा सकती है, को बताना नासमझी और गलती होगी।
इतनी दर्दनाक घटना को खामोशी के साथ दबे रहने देना चाहिए। हालांकि, कुछ सावधानियां बरतते हुए इस घटना को बताया जा सकता है, क्योंकि यह मेरे दोस्त के बेहतरीन, बताने लायक हुनर और गुणों को दिखाती है। मैं इस घटना की उन चीज़ों को बताने से बचूँगा जिससे कि घटना की बिलकुल सही जगहों या उससे जुड़े लोगों की जानकारी मिल सके।
बात उन दिनों की है जब हम लाइब्रेरी के पास एक आलिशान लॉज में रह रहे थे, जहाँ शरलॉक शुरूआती अंग्रेजी चार्टर की कुछ मुश्किल रिसर्च-जिनके नतीजे आने पर, वो मेरी आने वाली कहानियों का सब्जेक्ट हो सकता है, पर काम कर रहा था। एक दिन शाम को मिस्टर हिलटन सोम्स नाम का आदमी मिलने आया, जिसे हम जानते थे, और जो कॉलेज ऑफ़ सेंट ल्यूक्स का प्रोफेसर था। मिस्टर सोम्स एक लम्बा चौड़ा नर्वस किस्म का, जल्दी जोश में आ जाने वाला शख्स था। मैंने उसे हमेशा बेचैन ही देखा था, लेकिन इस बार वह ज्यादा ही परेशान था और मुझे वह अपने कंट्रोल में नहीं लग रहा था, साफ था कि कोई मामूली बात नहीं थी, जरूर कोई बहुत बड़ी बात हुई थी।
“मुझे यकीन है मिस्टर होम्स कि आप मुझे अपने कीमती समय में से कुछ समय देंगे। हमारे कॉलेज सेंट ल्यूक्स में एक बहुत ही दुःखद घटना घट गयी है, और सच में, ये तो अच्छा हुआ कि आप इस समय इसी शहर में हैं, वरना मुझे नहीं पता मैं क्या करता।”
“अभी तो मैं बहुत ही बिजी हूँ और मैं नहीं चाहता कि मेरा ध्यान कहीं और जाए।” मेरे दोस्त ने जवाब दिया। “मैं चाहता हूँ आप मेरे बजाय पुलिस की मदद लें।”
“नहीं, नहीं सर; ऐसा करना तो बिलकुल नामुमकिन है। अगर एक बार कानून की मदद ले ली तो फिर इस खबर को फैलने से नहीं रोका जा सकता और यह उन मामलों में से एक है जहाँ, कॉलेज की इज़्ज़त बचाने के लिये इस घटना को दबाना बहुत जरूरी है। आपके हुनर और ताकत के बारे में सब जानते है, पूरी दुनियाँ में बस एक आप ही हैं जो मेरी मदद कर सकते है। मैं आपसे विनती करता हूँ, मिस्टर होम्स, आप जो भी कर सकते हैं करें।”
पर मेरे दोस्त को अब भी कोई फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि वह अपनी बेकर स्ट्रीट वाली जानी-पहचानी जगह से दूर था। जहाँ पर ना उसकी नोटबुक और ना ही उसके केमिकल थे, और अपने घर पर नहीं होने की वजह से वह कुछ परेशान था। उसने लाचारी के साथ अपने कंधे हिला दिए, जबकि हमसे मिलने आया हुआ आदमी उत्तेजित हालत में जल्दी-जल्दी बोलता हुआ अपनी कहानी सुनाने लगा।
“मैं आपको पूरी कहानी बताता हूँ, मिस्टर होम्स, कल हमारे यहाँ फोर्टेसक्यू स्कॉलरसिप (Fortescue Scholarship) एग्जाम का पहला दिन है। मैं वहाँ पर एक एक्जामिनर हूँ, मेरा सब्जेक्ट ग्रीक है, और पहले पेपर में ग्रीक ट्रांसलेशन का एक बड़ा सा पैसेज है जो कि कैंडिडेट ने नहीं देखा है। यह पैसेज एग्जाम पेपर पर छपा है, और अगर यह पेपर किसी स्टूडेंट को पहले ही मिल जाये तो उसे इसकी तैयारी करने में आसानी होगी और उसे इसका फायदा होगा। इसलिए एग्जाम पेपर को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाये गए हैं”।
“आज लगभग तीन बजे पेपर के प्रूफ्स प्रिंटर से आये हैं। इसमें थ्यूसिसडीज़ (Thucydides) का आधा chapter होता है। मुझे इसे बड़ी सावधानी पड़ना था ताकि कहीं भी कोई गलती ना हो और लिखा हुआ एकदम ठीक छपा हो। साढ़े चार बजे, मेरा काम अभी पूरा नहीं हुआ था। लेकिन इस समय मैंने अपने दोस्त को उसके कमरे पर चाय पीने का वादा किया था, इसलिए मैं प्रूफ को टेबल पर छोड़कर चला गया। मुझे वहाँ लगभग एक घंटे से भी ज्यादा समय लगा”।
“आप तो जानते ही हैं मिस्टर होम्स, कि हमारे कॉलेज में दो दरवाजे लगे हैं, अंदर की तरफ हरे बेज़ का और बाहर की तरफ भारी ओक का दरवाजा लगा है। जैसे ही मैं वापस लौटकर बाहर के दरवाज़े पर पहुँचा तो उस पर चाबी लटकी हुई देखकर चौंक गया। एक पल के लिए मुझे लगा कि मैं चाबी यहीं भूल गया था, लेकिन जब मैंने अपनी जेब में देखा तो चाबी वहीं थी।
जहाँ तक मुझे पता है, दूसरी चाबी मेरे नौकर बैनिस्टर के पास रहती है, जो पिछले दस सालों से यहाँ की देखरेख कर रहा है, वह बहुत भरोसे का आदमी है, उसकी ईमानदारी पर शक नहीं किया जा सकता, और मुझे मालूम हो चुका था कि चाबी उसी की है क्योंकि वह मेरे कमरे में चाय पूछने आया था और बाहर जाते समय लापरवाही से चाबी वहीं दरवाज़े पर छोड़कर चला गया। जरूर मेरे जाने के कुछ ही मिनटों के बाद वह मेरे कमरे में आया होगा। किसी और मौके पर उसकी यह लापरवाही छोटी-सी भूल मानी जा सकती थी, पर आज के दिन इसके परिणाम बहुत बुरे हो सकते हैं”।
“जब मैंने अपनी मेज पर देखा तो मुझे पता लग गया कि किसी ने मेरे पेपरों के साथ छेड़छाड़ की है। इसका सबूत वो तीन पेपर्स थे। जिन्हें मैं एक साथ रखकर छोड़ गया था। पर, अब वह बिखरे हुए थे, उनमें से एक नीचे फर्श पर पड़ा था, और दूसरा खिड़की के पास कोने की टेबल पर, और तीसरा वहीं पर था जहाँ मैं छोड़कर गया था।”
होम्स ने पहली बार कुछ हलचल की।
“पहला पेज फर्श पर, दूसरा खिड़की पर और तीसरा जहाँ तुम उसे छोड़ गए थे,” उसने कहा।
“बिलकुल सही, मिस्टर होम्स। आपने तो मुझे हैरान कर दिया। आपने यह कैसे जान लिया?”
“आप अपनी दिलचस्प कहानी जारी रखिये।”
“एक पल के लिए तो मैंने सोचा कि बैनिस्टर ने मेरे पपरों से छेड़छाड़ करने की हिमाकत की है। लेकिन उसने इस इल्ज़ाम से साफ इनकार कर दिया, और मुझे भी भरोसा हो गया कि वह सच बोल रहा है। दूसरा यह भी हो सकता है कि किसी ने उधर से गुजरते हुए दरवाजे पर चाबी लटकती हुई देख ली थी, और वह जान गया कि मैं बाहर गया हुआ हूँ, और पेपर देखने अंदर चला गया हो। यह स्कॉलरशिप बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें बहुत बड़ी रकम दांव पर लगी हुई है, और इसलिए कोई भी बेईमान आदमी अपने साथी से आगे लाने के लिए ऐसा खतरा मोल ले सकता है”।
“बेनिस्टर इस घटना से बहुत ज्यादा परेशान हो गया था। वह लगभग बेहोश-सा हो गया था जब हमे यह पता चला की पपेरों से छेड़छाड़ की गयी है। मैंने उसे थोड़ी -सी ब्रांडी दी और एक चेयर पर पड़े रहने दिया। उसके बाद मैंने बहुत ध्यान से कमरे का जायज़ा लिया। जल्दी ही मैंने देखा कि घुसपैठिये ने बिखरे हुए पपेरों के पास अपने वहां होने के और भी निशान छोड़े हैं।
खिड़की के पास वाली टेबल पर पेन्सिल को तेज करने की कोशिश की गयी थी, क्योंकि वहाँ पेंसिल के छिलके पड़े हुए थे, लीड का एक टूटा हुआ टुकड़ा भी वहाँ पड़ा हुआ था। साफ जाहिर था कि उस बदमाश ने जल्दी-जल्दी में पेपर की नकल करने की कोशिश की और उसकी पेन्सिल की नोक टूट गयी, इसलिए उसे फिर से पेन्सिल को छिलने के लिए मजबूर होना पड़ा।”
“बहुत खूब!” होम्स ने कहा, जैसे-जैसे उसकी दिलचस्पी इस केस में बढ़ती गयी, वैसे-वैसे उसका खोया हुआ जोश भी वापस आने लगा। “भाग्य भी आपका साथ दे रहा है।”
“अभी खत्म नहीं हुआ है, आगे सुनिए! मैंने एक नई टेबल ली है, जिसकी सतह पर शानदार लाल लैदर चढ़ा हुआ है। मैं कसम खाने को तैयार हूँ, और बैनिस्टर भी, कि वह साफ- सुथरी थी और उस पर कोई खरोंच भी नहीं लगी हुई थी। पर अब उसमें तीन इंच लम्बा एक गहरा कट लगा हुआ है – खाली खरोंच ही नहीं बल्कि एक पूरा कट है। सिर्फ यही नहीं, बल्कि मुझे टेबल पर काले आटे या शायद काली चिकनी मिट्टी की एक छोटी-सी बॉल मिली, जिसमे कुछ बुरादे के जैसे धब्बे चिपके हुए थे। मुझे यकीन है कि ये निशान उसी आदमी ने छोड़े हैं, जिसने मेरे पेपर के साथ छेड़छाड़ की है।
इसके अलावा वहाँ ना पैरों के निशान थे और ना ही उसकी पहचान के लिए और कोई दूसरे सबूत मिले। उस समय मैं अपनी निराशा के गहरे समुंदर में डूब चुका था, तभी अचानक मुझे याद आया कि इन दिनों आप भी इसी शहर में रुके हुए हैं, और मैं इस मामले को सीधा आपके हाथों में सौंपने चला आया। मेरी मदद करें, मिस्टर होम्स! आप मेरी समस्या देखें। या तो मुझे उस आदमी को ढूँढना होगा या फिर एग्जाम्स को कुछ दिनों के लिए टालना होगा जब तक कि नए पेपर तैयार होते हैं, पर यह काम बिना अपनी सफाई दिए नहीं किया जा सकता, हो सकता यह बात आगे जा के और बड़ा रूप लेले। ऐसा हुआ तो ना सिर्फ कॉलेज, बल्कि पूरी यूनिवर्सिटी की बदनामी होगी। और इसलिए सबसे पहले मैं चाहता हूँ कि यह मामला चुपचाप और सावधानी से सुलझा लिया जाए।”
“मुझे इस मामले को देखने, आपको सलाह देने में और जो कुछ भी मैं कर सकता हूँ करने में ख़ुशी होगी,” खड़े होकर, अपना कोट पहनते हुए होम्स ने कहा। “यह केस भी कम दिलचस्प नहीं है। पेपर्स आपके पास आने के बाद क्या कोई आपसे मिलने कमरे में आया था?”
“हाँ; एक जवान लड़का, दौलत रास, वह एक इंडियन स्टूडेंट है, जो उसी फ्लोर में रहता है, और एग्जाम्स के बारे में कुछ पूछने मेरे पास आया था।”
“इसी के लिए वह आया था?”
“हाँ।”
“और वह पेपर आपकी टेबल पर थे?”
“जहॉँ तक मुझे ध्यान है वे रोल किये हुए थे”
“लेकिन उन्हें एग्जाम प्रूफ के तौर पर पहचाना जा सकता है?”
“हाँ; ऐसा हो सकता है।”
“आपके कमरे में और कोई नहीं आया था?”
“जी नहीं।”
“क्या कोई जानता था कि ये एग्जाम प्रूफ वहाँ होंगे?”
“प्रिंटर के आलावा कोई भी नहीं।”
“क्या वह आदमी बैनिस्टर जानता था?”
“नहीं, बिल्कुल नहीं। किसी को भी मालूम नहीं था।”
“बेनिस्टर अभी कहाँ है?”
“वह बहुत बीमार था, बेचारा। मैं उसे चेयर पर लेटाकर छोड़ आया। मैं आपके पास आने के लिए बहुत जल्दी में था।”
“आप अपना दरवाज़ा खुला छोड़ कर आये है ?”
“मैंने पहले एग्जाम पेपर को लॉक करके रखा दिया है।”
“इसका मतलब यह है, मिस्टर सोम्स, कि अगर उस इंडियन स्टूडेंट ने उन पेपर के रोल को एग्जाम प्रूफ के रूप में नहीं पहचाना, तो वह आदमी जिसने उन् पेपर के साथ छेड़छाड़ की, वह इत्तेफ़ाक़ से ही उन तक पहुंचा था, बिना यह जाने कि वो पेपर्स वहां हैं।”
“मुझे भी कुछ ऐसा ही लगता है।”
Puri Kahaani Sune…
“